बांग्ला नाटक ‘नाथवती अनाथवथ’ के हिंदी रूपांतर ‘पांचाली’ में शनिवार की रात महाभारत के प्रमुख किरदारों के एकल अभिनय के जरिए पूर्णिमा पांडेय ने रंगकर्मियों के जेहनोदिल में जगह बनाई। इसी के साथ दो दिनी अंतरराष्ट्रीय नाट्य समारोह का आगाज हो गया। पहली निशा दिल्ली और बनारस की नाट्य संस्थाओं की ओर से तीन नाटकों में रूपसज्जा, अभिनय और मौजूदा दौर से विषयवस्तुओं को लेकर प्रभाव छोड़ने की कोशिश की गई।
यह नाट्य समारोह बीएचयू के ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ परफार्मिंग आर्ट्स की ओर से आयोजित है। दिल्ली की टैलेंट नाट्य संस्था ने ‘अमन का पैगाम’ नाटक के जरिए मानवता का संदेश दिया। इस नाटक का निर्देशन किया इरशाद आलम ने। इसके बाद सांवली मित्र के बंग्ला नाटक ‘नाथवती अनाथवथ’ के हिंदी रूपांतर ‘पांचाली’ का भावपूर्ण मंचन यादगार बन गया।
सुरोजीत चटर्जी के निर्देशन में इस नाटक में दुर्योधन, धृतराष्ट, कर्ण, युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम से लेकर द्रोपदी तक के सभी पात्रों का किरदार पूर्णिमा पांडेय ने बहुत सलीके और सधे अंदाज में निभाकर हर किसी का ध्यान खींचा। एकल अभिनय पर आधारित इस नाटक में महाभारत की कथा को इस दौर को जोड़कर पेश करने की कोशिश की गई। इसके बाद मंथन नाट्य संस्था की ओर मुद्राराक्षस के चर्चित नाटक ‘गुफाएं’ मंचन किया गया। संचिता सरना, तौकीर खान ने अभिनय किया। रविवार को बंग्लादेश, उड़ीसा और ओसोम की नाट्य संस्थाएं प्रस्तुतियां देंगी।