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रूस-यूक्रेन संकट: बंकर के भीतर बिस्किट-टोस्ट खाकर दिन बिता रहा बनारस का उत्तम, 25 को था वापसी का टिकट

Sun, 27 Feb 2022 12:12 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी के भगवानपुर इलाके के उत्तम चतुर्वेदी रूस के हमले में यूक्रेन के सेंट्रल कीव में बीते चार दिनों से फंसा हुआ है। कॉलेज के बगल में बने बंकर में 22 साथियों के साथ छिपकर पड़ा है।
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चंद्रा सोनी और नरउर गांव के राहुल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पूर्वांचल के 21 से ज्यादा छात्र-छात्राएं यूक्रेन में फंस गए हैं। छात्रों ने सोशल मीडिया के जरिए भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। भारतीय छात्रों की हर पल की खबर जानने के लिए परिजन भारतीय दूतावास से संपर्क बनाए हुए हैं। परिवार के लोग बच्चों की सलामती के लिए सामूहिक पूजा पाठ कर रहे हैं और लगातार यूक्रेन पर हो रहे हमले की हर अपडेट के लिए टीवी के सामने नजरें गड़ाए हैं। 

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लंका क्षेत्र के भगवानपुर इलाके में स्थित विवेकानंद बंगाली कॉलोनी का रहने वाले उत्तम चतुर्वेदी तरस नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी सेंट्रल कीव से एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र हैं। रूस के हमले में यूक्रेन के सेंट्रल कीव में बीते चार दिनों से फंसा  है। उत्तम के पिता बृज भूषण चौबे ने शनिवार को बताया कि बेटे से लगातार फोन और इंटरनेट कॉल के माध्यम से संपर्क में हैं।

कॉलेज के बगल में बने बंकर में 22 साथियों के साथ छिपकर पड़ा है। जिस बंकर में उत्तम छिपा है, वहां से 10 किलोमीटर दूर गोलाबारी चल रही है। बंकर के भीतर बिस्किट, टोस्ट खाकर दिन बिता रहा। उत्तम ने वहां से अपने घर वीडियो बनाकर भेजकर अपने को सुरक्षित बताया।
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बृजभूषण ने बताया कि उत्तम की प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा 22 फरवरी को खत्म हुई है। 25 फरवरी को वापसी का टिकट था, लेकिन युद्ध शुरू होने के कारण टिकट कैंसिल हो गया। बेटे को सुरक्षित बुलाने के लिए पिता लगातार विदेशी दूतावास और विदेश मंत्रालय से संपर्क में हैं।

मोबाइल से संपर्क टूटने से परिजन हैं परेशान

रविंद्रपुरी की गुरुधाम कॉलोनी के रहने वाले सराफा व्यवसायी माधव सोनी की बेटी चंद्रा सोनी यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करती हैं और वहां फंसी हुई हैैं। चंद्रा के भाई वेंकटेश सोनी जर्मनी की राजधानी बर्लिन में एमबीए कर रहे हैैं। वह बर्लिन में ही रुककर पोलैैंड के रास्ते बहन के आने का इंतजार कर रहे हैं।

चंद्रा की मां विभा सोनी ने बताया कि बेटी का हॉस्टल विश्वविद्यालय कैंपस से बाहर है। वह एक अध्यापक और साथ पढ़ने वाले पांच भारतीय बच्चों के साथ वहां फंसी हैं। बिजली कट जाने से मोबाइल फोन चार्ज नहीं हो पा रहा है। इस कारण शुक्रवार से संपर्क भी खत्म हो चुका है।

चंद्रा दो साल से यूक्रेन की लेविव मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रही हैं। उन्होंने मां को बताया कि एटीएम बंद हो जाने से पैसे की समस्या भी आ सकती है। सुपर मार्केट में सामान की कमी हो रही है। अभी तो खाने की समस्या नहीं है, लेकिन यहां परिवार की नींद उड़ी हुई है। विभा ने बताया कि भारतीय दूतावास से बात हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखकर बेटी को वहां से निकालने की गुहार लगाई है।

यूक्रेन से बस से हंगरी के लिए रवाना हुए 70 छात्र

रोहनिया क्षेत्र के नरउर निवासी डॉ. सुशील कुमार पटेल राजातालाब में रहते हैं और इनका पुत्र राहुल सिंह यूक्रेन के एजहार्ड विश्वविद्यालय से एमबीबीएस के प्रथम वर्ष का छात्र है। परिजनों को जब युद्ध की जानकारी हुई तो सभी लोग सशंकित हो गए और अपने पुत्र के सकुशल लौटने की कामना करने लगे। मां चंद्रावती देवी ने बताया कि टीवी पर देखकर दिल दहल गया।
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बस में बनारस के बनारस के सात छात्र

डॉ. सुशील ने बताया कि बेटे से लगातार बात हो रही थी। वह बता रहा था कि जहां हम लोग हैं वहां पर अभी किसी तरह का खतरा नहीं है मगर वह काफी डरा लग रहा था। सुबह बेटे ने फोन कर बताया कि वह यूक्रेन से बस द्वारा हंगरी भेजा जा रहा है। बस में भारत के 70 छात्र हैं। इसमें बनारस के सात छात्र हैं। पिता ने सरकार की पहल की प्रशंसा की। जब बेटे ने बताया कि हम लोग बस में बैठ कर यूक्रेन से हंगरी के लिए चल दिए हैं तब काफी सुकून मिला। चिंताएं दूर हुईं।
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