अग्रवाल समाज के लोगों से भरा रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर तालयों की गूंज एवं हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा। रुद्राक्ष के बाहर भी सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने एलईडी स्क्रीन पर कार्यक्रम का लाइव लुत्फ उठाया। अंत में संस्था के सदस्यों ने उन्हें अंगवस्त्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ पद्मश्री पंकज उधास ने महाराज अग्रसेन की मूर्ति पर माल्यार्पण के साथ किया। स्वागत संतोष कुमार अग्रवाल, संचालन डॉ. राजेश अग्रवाल एवं डॉ रचना अग्रवाल ने किया। संयोजन नीरज अग्रवाल और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मधु अग्रवाल ने किया। इस दौरान श्री काशी अग्रवाल समाज (पीली पर्ची) के सदस्य, मारवाड़ी समाज, भारत विकास परिषद, लायंस क्लब, रोटरी क्लब के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
पद्मश्री पंकज उधास ने कहा कि काशी मोक्ष की नगरी है और जहां काशी विश्वनाथ धाम हो, वहां रहने वाले लोग धन्य हैं। जो बाबा के करीब होते हैं वे बड़े खुशनशीब होते हैं। बातचीत के दौरान गजल गायक पंकज उधास ने कहा कि वैश्वीकरण और बाजारवाद के दौर में गजल की अपनी जगह स्थिर है।
गजल संगीत नहीं संस्कार है। यह बिकने की वस्तु नहीं है। गजल में कोई ठहराव नहीं आया है, यह आज भी प्रवाहमान है। वर्तमान में कई नए गजल गायक काफी बेहतर कर रहे हैं और जल्द ही वे लोगों के सामने आएंगे। गजल आत्मा से निकली हुई और रूह को सुकून देती है। यही कारण है कि चिठ्ठी आई है जैसी गजलें आज भी लोगों की आंखें नम कर देती है।