रुद्राभिषेक 18 प्रकार के होते हैं। इससे 18 तरह के विशेष लाभ भी मिलते हैं। जल से अभिषेक से वर्षा, कुशोदक से असाध्य रोगों से शांति, दही से भवन-वाहन, गन्ने के रस लक्ष्मी की प्राप्ति, शहद एवं घी से धनवृद्धि, तीर्थ जल से मोक्ष की प्राप्ति, इत्र मिले जल से अभिषेक करने पर बीमारी दूर होती है। वहीं, दुग्ध से पुत्र प्राप्ति, शीतल जल व गंगा जल से ज्वर की शांति, घृत की धारा से वंश विस्तार, शकर मिले दूध से विद्वान की प्राप्ति, सरसों के तेल से शत्रु पराजित, शहद से तपेदिक दू, गोदुग्ध व शुद्ध घी से आरोग्यता, शकर मिश्रित जल से अभिषेक से पुत्र की कामना पूर्ण होती है।
मेष: शहद से अभिषेक। चंदन और लाल पुष्प चढ़ाएं।
वृषभ: दही से अभिषेक। सफेद फूल, बेलपत्र चढ़ाएं।
मिथुन: गन्ने के रस से अभिषेक। भांग, धतूरा, तथा बेलपत्र चढ़ाएं।
कर्क: दूध में शक्कर मिलाकर अभिषेक। श्वेत फूल, धतूरा और बेलपत्र चढ़ाएं।
सिंह: जल में मधु और गुड़ मिलाकर अभिषेक। कनेर का पुष्प, लाल रंग का चंदन, गुड़ और चावल से बनी खीर चढ़ाएं।
कन्या: गन्ने के रस से अभिषेक। भांग, दुर्वा, पान तथा बेलपत्र चढ़ाएं।
तुला: गाय के घी, इत्र या सुगंधित तेल या मिश्री मिले दूध से अभिषेक। सफेद फूल चढ़ाएं।
वृश्चिक: पंचामृत और शहद से जलाभिषेक। लाल फूल, लाल चंदन, बेलपत्र, बेल के पौधे की जड़ चढ़ाएं।
धनु: दूध में पीला चंदन मिलाकर अभिषेक। पीले रंग के फूल, खीर का भोग लगाएं।
मकर: गंगाजल, नारियल के पानी से अभिषेक। बेलपत्र, धूतरा, शमी व नीले कमल के फूल, भांग, अष्टगंध एवं उड़द से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
कुंभ: नारियल के पानी, सरसों व तिल के तेल से अभिषेक। शमी के फूल से पूजन करें।
मीन: केसर मिश्रित जल से जलाभिषेक। पंचामृत, दही, दूध और पीले पुष्प चढ़ाएं।