सिगरा थाना अंतर्गत छोटी गैबी निवासी राजेश जायसवाल (55 वर्ष) छह माह पूर्व से धोखाधड़ी मामले में जेल में निरुद्ध था। बृहस्पतिवार रात सीने में दर्द होने पर उसे मंडलीय अस्पताल ले जाया गया था और उपचार के बाद पुन: जेल में दाखिल कराया गया।
शुक्रवार तड़के अचानक दोबारा तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया, जहां रास्ते में ही बंदी ने दम तोड़ दिया। इस संबंध में जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने बताया कि बीमारी से बंदी की मौत हुई है। कुछ बंदियों ने माहौल खराब करने की कोशिश की, जिन्हें सीसी कैमरों के जरिए चिह्नित किया जा रहा है।
जिला कारागार में विचाराधीन बंदी राजेश कुमार जायसवाल की मौत की जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रीयल जांच का आदेश दिया है। जिला मजिस्ट्रेट कौशल राज शर्मा ने अपर नगर मजिस्ट्रेट चतुर्थ को जांच अधिकारी नामित किया है और निर्देश दिया है कि एक महीने में जांच आख्या उपलब्ध कराएं।
वाराणसी जिला जेल में बवाल
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जिला जेल चौकाघाट में बंदियों के बवाल की यह पहली घटना नहीं है, इसके पूर्व दो अप्रैल 2016 में जेल बेकाबू हुआ था। बंदियों ने एक डिप्टी जेलर की पिटाई के बाद घंटे भर से अधिक समय तक बंधक बनाए रखा था। पथराव, आगजनी, फायरिंग से जेल की दीवारें दहल उठीं थी।
कई बंदियों और सुरक्षा कर्मियों को चोटें आई थी। उस घटना की भी यादें ताजा हो गईं। इसके पूर्व 2014 में सेंट्रल जेल शिवपुर में बवाल हुआ था और कैदियों ने बंदी रक्षक समेत अन्य कर्मचारियों की बंधक बनाकर पिटाई की थी।
विभागीय जानकारों के अनुसार जेल में इन दिनों बंदियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। पूर्वांचल के बंदियों की पश्चिम से ट्रांसफर होकर आए बंदियों से तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। पिछले कुछ दिनों से बैरक में मारपीट की घटनाएं भी हो चुकी हैं। हालांकि बंदी राजेश की मौत के बाद सभी एकजुट हो गए थे।