वाराणसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा कि सनातन धर्म और संस्कृति किसी से भी भेद करने की इजाजत नहीं देती। जो लोग जाति, रंग, लिंग के नाम पर भेद करते हैं, वे ईश्वर की इच्छा के विरूद्ध कार्य करते हैं। पूरे विश्व को भगवान राम के चरित्र का अध्ययन और रामायण पर शोध कराना चाहिए।
बृहस्पतिवार को लमही स्थित सुभाष भवन में उन्होंने कहा कि विश्व के सभी नेताओं को इंसानियत को कलंकित करने वाले भेदभाव, छूआछूत को खत्म करने के लिए कदम बढ़ाने चाहिए। विश्व के विकसित देश केवल आर्थिक समृद्धि को विकास का मॉडल न बनाए, बल्कि समाज में व्याप्त सामाजिक एवं धार्मिक कुरीतियों को खत्म करने की संगठित योजना बनाएं। जो देश सबसे अधिक मानवाधिकार की बात करते हैं, वे गोरे-काले के रंग भेद से जूझ रहे हैं। जो मुस्लिम देश अपने धर्म की वकालत समानता के आधार पर करते हैं, वे लिंग भेद से जूझ रहे हैं और आजतक मस्जिदों में महिलाओं को नमाज पढ़ने का अधिकार नहीं दिला पाए हैं। इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत रिश्तों का देश है। इसीलिए भारत में मानवीय मूल्य सभी देशों से सबसे ऊपर हैं। यहां के धर्म ग्रंथ विश्व बंधुत्व और ब्रह्मांड की शांति का पाठ पढ़ाते हैं।
किन्नरों और वंचित समाज की महिलाओं से बंधवाई राखी
इंद्रेश कुमार ने कहा कि किन्नर समाज के लोग उपहास के नहीं, सम्मान के पात्र हैं। इनको सम्मान देने की परंपरा की शुरुआत सुभाष भवन से हो चुकी है और यही संदेश पूरी दुनिया को भेदभाव से मुक्त करेगा। इस दौरान उन्होंने वंचित समाज की महिलाओं व किन्नरों से राखी बंधवाकर रिश्तों का सम्मान एवं राखी से वैश्विक समरसता कार्यक्रम में रिश्तों को जोड़ने की शुरुआत की।