संघ प्रमुख ने कहा कि हम अपना परिवार नहीं भूलते, गांव, मोहल्ला, शहर, जिला और प्रदेश और फिर देश नहीं भूलते हैं। राष्ट्र हमारे लिए सर्वोपरि हो जाता है। वहीं, कुछ लोग इससे भी आगे बढ़ जाते हैं और एक समय पूरी दुनिया को ही अपना घर मान लेते हैं। ऐसे लोगों के सामने फिर सब झुकते हैं। बड़े-बड़े संपत्ति के मालिक, सत्तापति उनके सामने झुकता है। संघ प्रमुख ने कहा कि इस विवाह समारोह को देखिए यहां न कोई जाति है, न प्रांत, न भाषा की बाध्यता है। सभी का एक साथ विवाह हुआ है।
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मेरा अनुरोध है इस कार्यक्रम को हर साल करिए
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि मैं काशी के लोगों से अनुरोध करता हूं कि यह कार्यक्रम हर साल करें। इसी स्थान पर करिए और कभी किसी कारणवश यह पवित्र तीर्थस्थान उपलब्ध न हो तो कहीं दूसरी जगह करिए, लेकिन जरूर करिए। यह हमारे-आपके लिए बोध का कार्यक्रम है। यह हमें जिम्मेदार बनाने वाला कार्यक्रम है। यह समाज को एकजुट करने वाला, समाज को बनाने का माध्यम है। इस साल कन्यादान करने की जिन लोगों की इच्छा अधूरी रह गई है वह अगले साल इसी अक्षय तृतीया के मौके पर इस कार्यक्रम को और भव्य बनाकर अपनी इच्छा पूरी करें।
125 कन्याओं ने मुझे पिता स्वीकारा, मेरा परिवार जीवन भर ऋणी रहेगा : वीरेंद्र जायसवाल
कार्यक्रम संयोजक संघ क्षेत्र कार्यवाह वीरेंद्र जायसवाल ने कहा कि इन कन्याओं का कन्यादान करना मेरे परिवार का संकल्प था। यह समाज का ऋण है, जिसके लिए सभी को कन्यादान करना चाहिए। इन सभी 125 कन्याओं और इनके माता-पिता से मैंने निवेदन किया, कन्याओं ने मुझे पिता के रूप में स्वीकारा। इसके लिए मेरा परिवार आजीवन इन बेटियों का ऋणी रहेगा। सरसंघचालक को मैंने कार्यक्रम के बारे में बताया और उनसे यहां आने का आग्रह किया और वह अभिभावक के तौर पर यहां शामिल हुए। जब इसे शुरू किया तो समाज के कई लोगों ने आगे आकर सहयोग के लिए कहा तो मैंने उनका आभार जताया। मैंने कहा कि यह मेरा संकल्प है, इस बार मुझे कर लेने दीजिए, अगले वर्ष हम सब मिलकर इससे भी बड़ा कार्यक्रम करेंगे। प्रशासन के कर्मचारियों ने पोखर को साफ किया, गलियों में साफ सफाई की, मैं एक-एक कर्मचारी का जीवन भर आभारी रहूंगा।