जल निगम ने बुधवार को विरोध के बीच सारनाथ में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) का काम शुरू कर दिया। पुलिस और प्रशासनिक टीम के पहुंचते ही वहां गांव की महिलाएं भी पहुंच गईं। महिलाओं ने विरोध करने की कोशिश की लेकिन अधिकारियों ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें समझाकर शांत कराया, तब काम आरंभ हुआ।
बुधवार को सुबह 10 बजे एसीएम चतुर्थ राम शिरोमणि और जल निगम के अधिशासी अभियंता सतीश कई थानों की फोर्स, पीएसी और फायर ब्रिगेड के साथ पहुंचे। इसके बाद वहां काम कराना शुरू किया। काम जैसे ही प्रारंभ हुआ वहां आसपास की महिलाएं धमक पड़ी और विरोध करने लगी। इस पर एसीएम ने बताया कि इस जमीन पर कोई विवाद नहीं है। तब जाकर महिलाएं वहां से हटी। उन्होंने कोर्ट का आदेश दिखाया तो महिलाएं वापस हो गई। हालांकि काफी फोर्स होने के कारण मौके पर ग्रामीण विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
वरुणापार में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए जल निगम अब तक 184 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है, फिर भी वहां के लोगों की पहुंच से पानी दूर है। तकरीबन पांच लाख आबादी को पानी की सुविधा मुहैया कराने के लिए 268 करोड़ रुपये की लागत से सारनाथ में डब्ल्यूटीपी, पेयजल पाइप लाइन, ओवरहेड टैंक का निर्माण होना है। इसके बनने के बाद वरुणापार इलाके में बने 32 ओवरहेड टैंक से सप्लाई चालू हो जाएगी। सारनाथ में 200 एमएलडी क्षमता का डब्ल्यूटीपी बनाया जाना है। पहले चरण में 100 और दूसरे चरण में भी 100 एमएलडी क्षमता का प्लांट बनेगा। जल निगम के जेई अनूप, नवनीत और मेघा इंजीनियरिंग कंपनी के एनके डिडवानी भी मौजूद रहे।