लगातार हो रही बारिश के कारण यूपी के मऊ जिले में एक प्राथमिक विद्यालय में बने तीन कमरों की छत गिर गई। शुक्रवार की देर रात हुई इस घटना की जानकारी शनिवार की सुबह लोगों को हुई। लोगो ने इसकी सूचना प्रधानाध्यापक दी। रात के समय छत गिरने से बड़ा हादसा टल गया। अन्यथा की स्थिति में भारी जानमाल का नुकसान हो सकता था। बीएसए ने नगर शिक्षा अधिकारी से जांच आख्या मांगी है।
अमर उजाला ने 24 जुलाई के अंक में जर्जर स्कूल में पढ़ रहे बच्चे तथा एक अगस्त के अंक में बीएसए ने जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण का दिया आदेश शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। युसुफपुरा मुहल्ला स्थित प्राथमिक विद्यालय का पांच कमरों वाला जर्जर भवन लंबे समय से निष्प्रयोज्य था।
कैंपस में बने नए भवन के दो कक्षों में पठन पाठन का कार्य चलता था। जर्जर भवन का प्रयोग स्टोर के रूप में किया जा रहा था। हादसे की आशंका के मद्देनजर बीएसए ने जिले के समस्त परिषदीय विद्यालयों के परिसर में पड़े निष्प्रयोज्य जर्जर भवनों को ध्वस्तीकरण का फरमान जारी किया था।
प्रधानाध्यापक को विद्यालय प्रबंध समिति से प्रस्ताव बनाकर जर्जर भवनों को ध्वस्तीकरण कराना था, लेकिन आदेश के पालन में कोताही होती रही। शुक्रवार की रात विद्यालय के तीन कक्षों की छत अचानक ढह गई। कक्ष में रखा टाट पट्टी, बेंच, कुर्सी, विद्यालय अभिलेख सहित 50 हजार रुपया मूल्य का सामान नष्ट हो गया। अभी दो कक्ष भी गिरने की स्थिति में है।
विद्यालय का शौचालय भी जर्जर भवन की तरफ होने से बच्चे तथा शिक्षक दहशत में हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक मिसवाहुल हक का कहना है कि बजट की व्यवस्था न होने से निष्प्रयोज्य पड़े जर्जर भवन को नहीं गिराया जा सका। विद्यालय में कक्ष की कमी के चलते जर्जर भवन में सामान रखा जा रहा था।