पिता जी, यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारा पहला बड़ा मेडल है...। यह किसी गोल्ड से कम नहीं है। यह भावुक शब्द उस बेटे के थे जिसने एशियाई खेलों के पोडियम पर तिरंगा लहराया। फोन पर यह सुनते ही पूर्व मैराथन धावक पिता सभाजीत यादव की आंखें खुशी से छलक उठीं। कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने के तुरंत बाद रोहित यादव ने मछलीशहर तहसील के अदारी डभिया गांव में अपने पिता सभाजीत यादव को फोन किया। पदक गले में सजते ही रोहित ने अपनी यह कामयाबी अपने पिता के संघर्षों और देशवासियों को समर्पित किया।
पिता सभाजीत यादव ने बताया कि मुकाबला खत्म होने के कुछ देर बाद रोहित का फोन आया। उसकी आवाज में देश के लिए पदक जीतने का गर्व झलक रहा था। रोहित ने कहा कि भले ही रंग कांस्य का है, लेकिन एशिया के सबसे बड़े खेल मंच पर पहला पदक जीतना किसी स्वर्ण पदक से कम सुकून नहीं देता। बेटे के मुंह से यह बात सुनकर पिता अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए।