इधर, घटना से नाराज ग्रामीणों और परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर चक्का जाम कर दिया। सूचना पर पहुंचे नगर निगम के परिवहन निरीक्षक नृपेंद्र शंकर सिंह ने कर्मचारियों के चंदे से एकत्रित एक लाख रुपये की आर्थिक मदद तथा नगर निगम में सफाई कर्मी की पद पर संविदा पर एक व्यक्ति को नौकरी देने का आश्वासन देकर चक्का जाम समाप्त हुआ। उसके बाद रोहनिया पुलिस ने छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
मृतका तीन बहन और एक भाई में तीसरे नंबर पर थी। पिता की लगभग पांच साल पहले मौत हो चुकी है। माता सपना देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।