आवास और सड़क बनवाने का दिया भरोसा
जिलाधिकारी ने रागिनी के परिवार की समस्याओं की भी जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत परिवार को आवास दिलाने का आश्वासन दिया। घर में शौचालय नहीं होने की जानकारी मिलने पर अधिकारियों से स्थिति पूछी गई। बताया गया कि शौचालय के लिए धनराशि मिल चुकी है और जल्द निर्माण कराया जाएगा। रागिनी के घर से स्कूल तक जाने वाले जर्जर मार्ग को देखकर डीएम ने प्रधान, सचिव और बीडीओ को सड़क का एस्टीमेट तैयार कर भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने गांव की अन्य समस्याओं की भी जानकारी ली और वहां रहने वाले दिव्यांगजनों का विवरण तैयार कर रिपोर्ट देने को कहा।
छह माह की उम्र में टूटा था पैर, इलाज में बिक गए गहने
रागिनी के पैर के इलाज के बारे में जिलाधिकारी ने उसकी मां बबीता से जानकारी ली। बबीता ने बताया कि रागिनी करीब छह माह की थी, तभी उसे इलाज के लिए बलिया ले जाते समय रास्ते में हादसा हो गया और उसका पैर टूट गया। इसके बाद मऊ तक कई जगह इलाज कराया गया। इलाज में करीब चार लाख रुपये खर्च हो गए। बेटी के इलाज के लिए उसने अपने शरीर के सारे गहने तक बेच दिए। काफी इलाज के बाद डॉक्टरों ने बताया कि पैर अब ठीक नहीं हो पाएगा। इसके बाद वह थक-हारकर बैठ गई।
रागिनी के इलाज को लेकर डीएम ने सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय से जानकारी ली और बच्ची की जांच कराने के बाद हायर सेंटर भेजने के निर्देश दिए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि पैर काफी समय से टूटा होने के कारण उसे जोड़ना संभव नहीं है, हालांकि बच्ची की आवश्यक जांच कराई जाएगी। पीएचसी मनियर प्रभारी डॉ. दिग्विजय कुमार को रागिनी को वाहन से बलिया ले जाकर जांच कराने की जिम्मेदारी दी गई।
भावुक होकर बोली-‘नहीं, मत जाइए’
रागिनी से बातचीत के दौरान माहौल उस समय भावुक हो गया, जब डीएम वापस लौटने लगे तो बच्ची ने उनसे कहा, “नहीं, मत जाइए।” रागिनी की इस मासूम पुकार ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि रागिनी की पीड़ा ही थी, जिसने जिलाधिकारी को गांव तक आने के लिए मजबूर किया। डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि रागिनी की पुकार जब खबरों के माध्यम से सामने आई तो वह उससे मिलने आए। बच्ची का हरसंभव इलाज कराया जाएगा और उसकी वास्तविक जरूरत के अनुसार मदद की जाएगी।
अमर उजाला की खबर पढ़कर मदद को आगे आए आनंद
अमर उजाला में रागिनी की खबर प्रकाशित होने के बाद गुजरात के सूरत में वोल्टा ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कार्यरत जौनपुर निवासी आनंद उपाध्याय ने अमर उजाला से दूरभाष पर संपर्क किया। उन्होंने कहा कि रागिनी के इलाज और उसकी जरूरत की हर चीज पूरी करने के लिए वह तत्पर हैं। इलाज में चाहे जितना खर्च आए, वह परिवार का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने परिवार से अपील की कि वे जहां उचित समझें, वहां बच्ची का इलाज कराएं, इलाज का पूरा खर्च वह वहन करेंगे। इस दौरान सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह, डीपीआरओ अवनीश कुमार श्रीवास्तव, बीडीओ मनियर शत्रुघ्न सिंह, पीएचसी मनियर प्रभारी डॉ. दिग्विजय कुमार, ग्राम पंचायत सचिव गिरीश कुमार पांडेय, ग्राम प्रधान राजू प्रसाद सहित अन्य अधिकारी व ग्रामीण मौजूद रहे।
सोशल मीडिया पर मदद के लिए बढ़े हाथ
दिव्यांग...लेकिन साहसी रागिनी की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मदद के लिए कई हाथ आगे आए हैं। किसी ने ट्राई साइकिल देने की बात कही है तो किसी ने अस्पतालों के नाम सुझाए हैं। आम आदमी पार्ट के कार्यकर्ताओं ने रागिनी के घर पहुंच व्हील चेयर और 25 हजार की मदद उपलब्ध कराई। आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इसे अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया है।