अमर उजाला के ‘काशी विरासत’ कार्यक्रम में शामिल अतिथिगण।
विरासतों और परंपराओं को सहेजने, धरोहरों के अतीत को जानने और उनके संरक्षण के अलावा नदियों और जलाशयों का मानव जीवन के अस्तित्व से अंतर्संबंधों की तलाश अमर उजाला की ओर से आयोजित ‘काशी विरासत’ कार्यक्रम में की गई । व्यस्त जीवन की उलझनों से वक्त चुरा कर समाज के हर वर्ग की महत्वपूर्ण शख्सियतें एक जगह जुटीं और काशी की विरासत को संरक्षित-संवर्द्धित करने के लिए अपने अनुभव और विचार साझा किए। आयोजन में एकत्रित जनप्रतिनिधियों, संतों, शिक्षाविदों, शासन-प्रशासन के आला अफसरों, उद्यमियों और प्रबुद्धजनों ने काशी की विरासत को स्वयं संजोने का संकल्प तो लिया ही, यह भी तय किया कि वे और लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे ताकि हमारी पीढ़ियों के लिए आने वाले कल सुखद, सुहावना और बेहतर हो...।
काशी और उसकी विरासत को संजोने, संवारने की दिशा में शनिवार की रात यादगार बन गई। कैंट स्थित होटल मदीन में अमर उजाला की ओर से आयोजित ‘काशी विरासत’ कार्यक्रम के दौरान काशी की प्राचीन धरोहरों, नदियों, कुंडों-तालाबों आदि की मौजूदा हालत का जिक्र हुआ। विशेषज्ञ वक्ताओं ने कहा कि कभी काशी की पहचान रहीं वरुणा और असि नदी अपनी अस्तित्व रक्षा के लिए करुण पुकार कर रही हैं। परंपराओं और रीतियों से जुड़े प्राचीन कुंड और तालाब मनुष्य के स्वार्थ और शहरीकरण की आड़ में हो रहे अवैध कब्जों की भेंट चढ़ते जा रहे हैं।
अमर उजाला के डायरेक्टर प्रोबाल घोषाल की मौजूदगी में हुए विचार-विमर्श के दौरान बताया गया कि काशी की प्राचीन विरासत के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ‘अमर उजाला’ निरंतर अभियान चला रहा है। खबरों की शृंखलाओं के जरिए लोगों को अपने गौरवशाली अतीत की याद दिलाते हुए बेहतर भविष्य के निर्माण का प्रयास कर रहा है। इस दौरान काशी की विरासतों के महत्व और उनके मौजूदा हालात का प्रस्तुतिकरण भी किया गया। इस मौके पर मौजूद सभी विशिष्टजनों ने विरासत की गरिमा और उसके महत्व को स्वीकार किया तथा उनकी अस्तित्व रक्षा के लिए हर स्तर पर प्रयास करने का भरोसा भी दिलाया। इस अवसर पर मौजूद संत समाज ने भी अपनी भूमिका निभाने का वचन दिया। कार्यक्रम का संचालन स्वाति झिंगरन ने किया।