कोचर ने कहा कि अजनाला के काले कुएं की खोज ने 167 साल पुरानी गाथा को उजागर किया, जिसे जलियांवाला बाग हत्याकांड की तरह ब्रिटिश साम्राज्य के अत्याचारों का प्रतीक माना जा सकता है। शुरुआत में गुरुद्वारों और स्थानीय लोगों से भी सहयोग नहीं मिला। अंग्रेजों ने मारकर ही नहीं बल्कि 69 सैनिकों को तो जिंदा ही कुएं में फेंकवा दिया था।
पीएमओ को भेजा गया था लेटर
बीएचयू में अजनाला से जुड़े वैज्ञानिकों ने बताया कि पीएमओ को भी लेटर भेजा गया था। वहां से इसे एएसआई को भेज दिया गया। लेकिन, वहां से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। कार्यक्रम के आयोजक बीएचयू के जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा कि शहीद सैनिकों का उनके धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार कराया जाना है। क्योंकि, इनकी मौत अंग्रेजों से संग्राम के दौरान हुई थी, इसलिए इनका रीति रिवाज के साथ अंत्येष्टि जरूरी है। इन सभी सैनिकों की डिटेल ब्रिटिश सरकार के पास है, जिसे भारत लाया जाना चाहिए। इसी के आधार पर उन शहीदों के वंशजों की खोज की जा सकती है।