डॉ. राघव कुमार और अनुपम यादव
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देखने पर पता चला कि चूहों के दैनिक शुक्राणु उत्पादन में गंभीर गिरावट आई। इसके साथ ही शुक्राणु में रूपात्मक या संरचनात्मक असामान्यता भी देखने को मिली। विशेष रूप से एपिडीडिमल शुक्राणु (यह शुक्राणु पुरुष प्रजनन सहायक संरचनाओं में से एक में संग्रहित और परिपक्व होता है) तनाव के जोखिम से प्रतिकूल रूप से प्रभावित थे। इसके अलावा शुक्राणु की मूल संरचना में भी असामान्यता देखने को मिली।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि तनाव ने पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) संश्लेषण को भी बाधित किया और वृषण में ऑक्सीडेटिव तनाव (हानिकारक अणुओं और एंटी-ऑक्सीडेंट एंजाइमों के बीच असंतुलन) में भी वृद्धि की। डॉ. राघव कुमार मिश्रा ने कहा कि यह अध्ययन मनोवैज्ञानिक तनाव और प्रजनन कल्याण के संबंध में विश्लेषण के नए क्षेत्रों के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकता है।