निकोबार के लोगों का जीन अभी भी प्योर है।
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अध्ययन में कई जानकारियां आईं सामने
इस अध्ययन ने विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में रहने वाली तिन-माल नामक जनजाति के डीएनए की समानता निकोबार के लोगो से सबसे ज्यादा बतायी। इस अध्ययन ने दक्षिण पूर्व एशिया में रहने वाली जनजाति तिन-माल की विशिष्ट आनुवंशिक पहचान उजागर किया, जो दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे पुरानी भाषा ऑस्ट्रोएशियाटिक बोलती हैं। इस समुदाय ने समय के साथ निकोबार जनजातियों के साथ उल्लेखनीय अनुवांशिक विशिष्टता बनाए रखी है, जो इनकी भाषा में भी परिलक्षित होता है यह बात टीम के भाषा वैज्ञानिक डॉ जॉर्ज वैन द्रिएम ने कही।
प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि यह महत्वपूर्ण शोध दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे प्राचीन ऑस्ट्रोएशियाटिक भाषा और उसके दक्षिण एशिया के साथ निकोबार में अनुवांशिक प्रसार की समयावधि का सटीक विश्लेषण करता है। साथ ही एक आश्चर्य जनक बात और निकल कर आती है की निकोबारी जनजाति प्राचीन ऑस्ट्रोएशियाटिक के जीनपूल को अभी भी संरक्षित किए हुए है।
बीएचयू आर्कियोलोजी के डॉ. सचिन तिवारी ने कहा की दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच आर्कियोलोजी द्वारा खोजे गए लिंक को डीएनए शोध भी प्रमाणित करता है
इस शोध टीम के अन्य सदस्य बीएचयू से डॉ. राहुल मिश्र, डॉ. प्रज्ज्वल प्रताप सिंह, शैलेश देसाई, प्रतीक पाण्डेय, बीएसआईपी लखनऊ से डॉ. नीरज राय, कलकत्ता यूनिवर्सिटी से डॉ. राकेश तमांग और अमृता विश्वविद्यापीथम से डॉ. प्रशांत सुरावझाला थे।