पांच सालों में आए 1532 मामले
पूर्वांचल के 10 जिलों में बीते पांच साल में पराली जलाने की कुल 1532 घटनाएं हुईं। इसमें भी सबसे ज्यादा बलिया में 449, जौनपुर 269, आजमगढ़ में 241, गाजीपुर में 181, मऊ में 161, चंदौली में 131, मिर्जापुर में 56, भदोही में 26, वाराणसी में 14, सोनभद्र में चार घटनाएं हुईं।
ये है जुर्माने की राशि
पराली जलाने के मामले में शासन ने जुर्माने की राशि दोगुना करते हुए कार्रवाई का प्रावधान किया है। दो एकड़ से कम भूमि वाले किसानों से 2500 रुपये जुर्माना, दो से पांच एकड़ भूमि वालों पर 5000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक भूमि में पराली जलाने वाले किसानों पर 15000 रुपये तक का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। यदि कोई किसान पराली जलाने की पुनरावृत्ति करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाती है।
पराली जलाने के ये हैं दुष्प्रभाव
क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के सहायक निदेशक राजेश राय ने बताया कि पराली जलाने से पार्टिकुलेट मैटर, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसे हानिकारक प्रदूषक निकलते हैं। इसके तमाम दुष्प्रभाव हैं। मिट्टी के पोषक तत्वों में कमी आती है। साथ ही वायु को प्रदूषित करने के साथ ही मानव के सांस लेने, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्या बढ़ जाती है। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ जाता है।
इनकी भी सुनें
पराली जलाने से रोकने के लिए हर साल जागरूकता अभियान चलाया जाता है। पराली को उर्वरक में बदलने के लिए वेस्ट डी-कंपोजर किसानों को दिए गए। फिर भी जिन किसानों को पराली जलाते सेटेलाइट ने पकड़ा है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। - एके सिंह, प्रभारी, संयुक्त कृषि निदेशक, वाराणसी मंडल
जिले में कुल 87 मामले आए थे। इसमें से 48 मामले सत्यापित हुए हैं। इन पर जुर्माने की कार्रवाई चल रही है। पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। - मनीष सिंह, उपनिदेशक कृषि, बलिया