प्रो. मनोज पांडेय का कहना है कि शोध के माध्यम से एक ऐसा टूल बनाया गया है, जिसके माध्यम से समस्याओं को बहुत हद तक आसानी से जाना जा सकता है। इसको साइको सैक्सुअल इनवेंट्री नाम दिया गया है। इसमें करीब 40 से अधिक सवालों का संबंधित मरीज को जवाब देना होगा। उनके जवाबों के आधार पर ही यह जाना जा सकता है कि मनोयौनवृत्ति है कि नहीं।
प्रो. मनोज के अनुसार कैंसर के मरीजों में मनोयौनवृत्ति की समस्या अधिक होती है। एक तो उनकी खुद की बीमारी का डर फिर उसका इलाज करवाने की चिंता। पहले फेज में 100 और दूसरे फेज में 250 मरीजों को लिया गया। कैंसर के उपचार में आमतौर पर सर्जरी, लक्षित दवाएं, विकिरण या कीमोथेरेपी शामिल होती है।
ये जीवन रक्षक तो होती हैं लेकिन इस तरह के उपचार के बाद शारीरिक, मानसिक प्रभाव भी पड़ता है। इसमें संबंधित मरीज को तनाव, चिंता और अवसाद जैसी विकृतियां भी होती हैं। मनोयौन शिथिलता, जिसे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों के कारण बिगड़ी यौन स्वास्थ्य के रूप में परिभाषित किया जाता हैं।
इन वजहों से कैंसर के मरीजों को हो रही समस्या : नपुंसकता, शारीरिक असुविधाएं यौन संतुष्टि में बाधा डालती हैं, उदास और अवसादग्रस्त महसूस करना, थकान, भोजन ग्रहण न कर पाना।