नहीं निकालने पड़ेंगे अंग
मधुमेह से पीड़ित लोगों के घाव भरने में काफी कठिनाई होती है क्योंकि शरीर में ग्लूकोज का स्तर लंबे समय तक उच्च स्तर पर बना रहता है। सामान्य घाव कुछ दिनों में भर जाते हैं, जबकि डायबिटिक घाव कई महीनों तक बने रहते हैं, जिससे गंभीर संक्रमण और कई मामलों में अंग निकालने तक की नौबत आ जाती है।
चिंताजनक तथ्य यह है कि हर 20 सेकंड में दुनिया में एक व्यक्ति डायबिटिक घावों के कारण अपना अंग खो देता है। डॉ. मुखर्जी ने आगे जानकारी दी कि डायबिटिक चूहों पर यह परीक्षण किया गया है। यह थेरेपी अभी केवल पशु मॉडल्स पर परखी गई है, फिर भी यह एक ऑफ-द-शेल्फ घाव उपचार समाधान है।
यह न केवल भारत की स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि लाखों मरीजों के जीवन में आशा की नई किरण जगाता है। संस्थान इंजीनियरिंग, चिकित्सा और जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों के संगम पर कार्य करते हुए समाजोपयोगी, अत्याधुनिक अंतरविषयी अनुसंधान को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। - प्रो अमित पात्रा, निदेशक, आईआईटी बीएचयू