इसमें पहले चरण में नान इंफेक्ट किया जाता है। दूसरे चरण में वायरस का आरएनए-डीएनए जो भी होता है, उसे निकाला जाता है। इसमें आरएनए आईसोलेटेड किया जाता है। डॉ. गंगवार ने बताया कि तीसरे चरण में आरटीपीसीआर मशीन में जांच के बाद पता चलता है कि रिपोर्ट पॉजीटिव या निगेटिव है। इस शोध में यह बताया गया है कि आरएनए निकालने की जरूरत नहीं है। ऐसे ही कोरोना की जांच हो जाएगी।
केवल एक केमिकल को थोड़ा सा ब्वायल कर सीधे जांच के लिए लगाया जा सकता है। शोध में कुछ सैंपल की जांच हुई, जिसमें बेहतर परिणाम आया है। डॉ. मयंक गंगवार ने बताया कि इसका एक फायदा यह भी है कि आटोमेटिक मशीन पर की गई यह जांच एक सैंपल में करीब 150 रुपये खर्च होंगे जबकि साधार मशीन पर होने वाली जांच में 300 रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में आने वाले दिन में अगर इस तकनीक से जांच होगी तो धन की भी बचत होगी।