पड़ोसी जनपद जौनपुर के नेवढ़िया थाना क्षेत्र के कादीहद गांव में करीब दो हजार वर्ष पुरानी बस्ती के अवशेषों के आसपास खुदाई से लगातार अतीत की धुंध छंट रही है। यहां लाल, काले मृद्भांडों के अलावा मानव, पशु अस्थियों के अवशेष भी मिले हैं।
इन अवशेषों को गांव के ही कुछ लोग सुरक्षित रखवा रहे हैं। साथ ही ईंट भट्ठे के लिए मिट्टी की खुदाई में लगे मजदूरों को सावधानी से खुदाई करने की सलाह दी जा रही है। गांव में कुषाणकालीन टीला होने की पुष्टि पुरातत्व विभाग ने की है।
हालांकि अब तक खुदाई में मिलने वाले अवशेषों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा सके हैं। कादीहद गांव में ईंट की पथाई का काम चल रहा है। इसके लिए हो रही खुदाई में पुरावशेष मिल रहे हैं।
इन्हें गांव के ही युवक शशिकांत सिंह ने भट्ठा मालिक भानुप्रताप सिंह की छावनी पर सुरक्षित रखने का प्रयास किया है। लोगों का कहना है कि अवशेषों के मिलने की जानकारी होने के बाद भी कोई जिम्मेदार अफसर गांव में नहीं पहुंचा है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव का कहना है कि जहां प्राचीन बस्ती के प्रमाण मिल रहे हैं, वह जमीनें किसानों के कास्त की हैं। ऐसे में उन स्थलों के संरक्षण में कठिनाई आ रही है।
फिलहाल प्रधान से आग्रह किया गया है कि वह वहां खुदाई में मिलने वाली दुर्लभ वस्तुओं का अपने स्तर पर संरक्षण कराएं ताकि उनको नष्ट होने से बचाया जा सके।