आईएमए से जुड़े कर्मचारी आनंद सिंह का नाम खून की तस्करी में शामिल होने की सूचना के बाद से आईएमए प्रशासन सतर्क हो गया है। अब तक यहां ब्लड, प्लेटलेट्स का तो रिकॉर्ड कंप्यूटर और कागजात में दर्ज होता था, लेकिन प्लाज्मा का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था। डॉ. मनीषा सिंह ने बताया कि इन प्लाज्मा को एक मुश्त एक कंपनी को हर महीने दे दिया जाता है। अब ब्लड बैंक से कितना प्लाज्मा महीने में दिया गया है, इसका पूरा ब्योरा दर्ज होगा। ताकि प्लाज्मा बैग के बारे में जानकारी मिल सके।
ब्लड बैंक से बिना कागजात ब्लड बेचे जाने की रिपोर्ट के बाद आईएमए और औषधि विभाग में रार बढ़ती जा रही है। औषधि निरीक्षक सुभाष दूबे का कहना है कि जो अनियमितताएं मिली हैं, उसकी जांच तो जारी रहेगी। जनहित को देख फिलहाल ब्लड बैंक संचालन का निर्देश दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कर्मचारियों की गतिविधि पर रहेगी विशेष नजर
आईएमए अध्यक्ष डॉ. मनीषा सिंह, सचिव डॉ. आरएन सिंह ने कहा कि जांच में सहयोग किया जा रहा है। तस्करी में जिस कर्मचारी का नाम सामने आ रहा है, उसे 16 जुलाई को ही बर्खास्त किया जा चुका है। बाकी दो कर्मचारियों को पूछताछ के लिए अभी सेवा देने से मना किया गया है।
जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनसे सेवा लेने पर फैसला होगा। बताया कि कर्मचारियों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। सीसीटीवी की नियमित निगरानी के साथ ही समय-समय पर ब्लड बैंक प्रभारी से भी बातचीत कर फीडबैक लिया जाएगा।