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काशी में टूटा रिकॉर्ड, न्यूनतम स्तर पर पहुंचा गंगा का जलस्तर

Thu, 26 Apr 2018 04:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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अस्सी घाट से 70 फीट दूर हुईं गंगा - फोटो : अमर उजाला
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धर्म नगरी काशी में गंगा पर संकट गहराता जा रहा है। जलस्तर पिछले आठ साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका है जबकि अभी मई और जून का महीना बाकी है। जलस्तर में गिरावट की बड़ी वजह प्रवाह न होने के कारण गंगा में आया ठहराव और अंधाधुंध भूजल दोहन बताया जा रहा है।
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जलस्तर में गिरावट के साथ प्रदूषण स्तर में इजाफा होने से जलीय जीव भी संकट में हैं। गंगा को रिचार्ज करने वाले नदी के किनारे स्थित जल के सोते भी अब सूखने लगे हैं।

गंगा के जलस्तर में कमी से पाट सिकुड़ते जा रहे हैं और गंगा घाटों से दूर होती जा रही है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2010 में गंगा का औसत जलस्तर 58 मीटर से अधिक था जबकि अप्रैल 2018 में यह 56.615 मीटर तक आ पहुंचा है।
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यह जलस्तर 24 अप्रैल 2018 को रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले पिछले आठ साल में गंगा का न्यूनतम जलस्तर नौ जुलाई 2010 को रिकॉर्ड किया गया था, जो 57.16 मीटर था। 
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... तो और चुनौतिपूर्ण हो जाएंगे हालात

ललिता घाट पर ऐसा है नजारा - फोटो : अमर उजाला
नदी विज्ञानी प्रो. यूके चौधरी का कहना है कि औसतन गर्मियों में चालीस प्रतिशत पानी गंगा में रह जाता है, लेकिन भूजल के अंधाधुंध दोहन और अवैज्ञानिक तरीके से सिंचाई की वजह से ये अब 25 से 30 फीसदी तक ही रह गया है। वहीं अपर गंगा कैनाल और लोअर गंगा कैनाल सहित भीमगौड़ा और नरौरा बैराज भी काफी पानी रोक लेते हैं। 

अब क्लीन गंगा नहीं सेव गंगा की बात हो
नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी का कहना है कि कुछ साल पहले तक बनारस में गंगा की चौड़ाई 800 मीटर हुआ करती थी। जिसे तैर कर पार करना काफी चुनौतिपूर्ण माना जाता लेकिन अब गंगा की चौड़ाई बमुश्किल 400 मीटर रह गई है। वहीं इसकी गहराई जहां 60 मीटर के आसपास हुआ करती थी, वह भी सिल्ट और बालू जमा होने से कम हुई है। 
 
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