राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी मंदिर के महंत से वार्ता करते हुए
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बनारस में संत रविदास की जन्मस्थली सीरगोवर्धन स्थित मंदिर के विकास को लेकर रूपरेखा तैयार की जा रही है। स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर 100 एकड़ क्षेत्र में जन्मस्थली को विकसित किया जाएगा।
राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी और जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने रविवार को मंदिर प्रबंधन के साथ बैठक कर जन्मस्थली को तीर्थ धरोहर के रूप में विकसित करने की योजना पर चर्चा की। इस योजना को मूर्तरूप देने की जिम्मेदारी विकास प्राधिकरण को सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविदास जयंती के मौके पर वाराणसी में रविदास जन्मस्थली को तीर्थ धरोहर के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। उसी के तहत रविवार को राज्यमंत्री और प्रशासनिक अमला जन्मस्थली पहुंचा।
इसमें मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में संत रविदास की जन्मस्थली को भव्य रूप देने के लिए सौ एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई। अधिकारियों ने मंदिर के आसपास और दूसरे स्थानों पर जमीन उपलब्ध कराने की बात कही।
ड्राफ्ट प्रपोजल बनाने का दिया गया निर्देश
संत रविदास की जन्मस्थली
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राज्यमंत्री ने भरोसा दिया कि जल्द ही जमीन के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। योजना के तहत 150 बेड का अस्पताल, आडिटोरियम, सत्संग हाल, संतों, सेवादारों के लिए आवास, वाचनालय, गौशाला एवं अन्य सुविधाएं भी होंगी।
मंदिर के चारों ओर श्रद्धालुओं के लिए 50 मीटर चौड़ा परिक्रमा पथ भी बनाया जाएगा। इसके लिए मंदिर के आसपास के भवनों का अधिग्रहण किया जा सकता है।
जन्मस्थली को विकसित करने की कार्ययोजना वाराणसी और पंजाब के आर्किटेक्ट मिलकर तैयार करेंगे। जिला प्रशासन जल्द ही योजना का प्रारूप प्रदेश सरकार को भेजेगा।
जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने बताया कि संत रविदास जन्मस्थली को भव्यता प्रदान करने की योजना पर चर्चा हुई है। विकास प्राधिकरण को इसका ड्राफ्ट प्रपोजल बनाने का निर्देश दिया गया है।