केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीनों विश्वविद्यालय के कुलपतियों से डिजिटल सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वो अपने विश्वविद्यालय की वेबसाइट अपडेट करें। विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक और पारंपरिक पक्षों का उल्लेख वेबसाइट पर होना चाहिए।
बुधवार को बनारस में काशी विद्यापीठ के समिति कक्ष में ‘उच्च शिक्षा के संदर्भ में सूचना एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका’ पर आयोजित गोष्ठी में वो बीएचयू, काशी विद्यापीठ, संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपतियों व आईआईटी बीएचयू के निदेशक से मुखातिब थे।
उन्होंने कहा कि मैं विश्वविद्यालयों की वेबसाइट मॉनिटर करता हूं। आपके विश्वविद्यालय की वेबसाइट ठीक नहीं है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने काशी विद्यापीठ का जिक्र किया। काशी विद्यापीठ में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री पढ़े हैं। स्वाधीनता आंदोलन की यह पवित्र भूमि रही है। कई स्वतंत्रता सेनानी उस दौर में काशी विद्यापीठ और बीएचयू आए। इसका उल्लेख वेबसाइट पर होना चाहिए।
वेबसाइट पर विश्वविद्यालय की विरासत का परिचय मिलना चाहिए। हर कोई एक दूसरे से जुड़ना चाहता है, लोग पढ़ना चाहते हैं। काशी की क्रिएटिव इमेज वेबसाइट पर मिलनी चाहिए। ये चीजें एक दूसरे से लोगों को जोड़ती हैं।
उन्होंने कुलपतियों से कहा कि आप छात्रों के बीच डिजिटल इंपावरमेंट लाइए। डिजिटल भारत को पारंपरिक भारत के साथ बदलें। भारत का मौलिक संविधान मंगाइए, विद्यार्थियों को पढ़ाइए, डिजिटली उसका प्रचार प्रसार करिए।
ई-हेल्थ, ई-रिक्शा, ई-स्कालरशिप का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार डिजिटल इंडिया की ओर से तेजी से बढ़ रही है। बताया डीएल को आधार कार्ड से जोड़ने की तैयारी चल रही है क्योंकि नाम बदला जा सकता है, अंगुलियों के निशान नहीं।
बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर, विद्यालय के कुलपति प्रो. टीएन सिंह, संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. राजाराम शुक्ल, आईआईटी के निदेशक प्रो. राजीव संगल समेत वरिष्ठ प्रोफेसर मौजूद रहे।