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रावण जन्मा, राक्षसों के अत्याचार से डोली धरती

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रावण का यज्ञ संपन्न हुआ। ब्रह्मा जी ने उसे अमरत्व का वरदान दे दिया। अब मनुष्य और वानर के सिवा कोई भी उसे मार नहीं सकेगा। वरदान पाकर दंभ से चूर रावण ने देवलोक में खलबली मचा दी। कुबेर पर चढ़ाई कर उनका पुष्पक विमान छीन लिया। घबराए देवराज इंद्र देवताओं को लेकर बैकुंठ पलायन कर गए। संपूर्ण धरती राक्षस राज के अत्याचार से कांप उठी। शुक्रवार शाम रावण जन्म के प्रसंग के साथ रामनगर की रामलीला का शुभारंभ हुआ। कोरोना संक्रमण के दो साल के बाद रामनगर का सन्नाटा भी खत्म हो गया।
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काशीराज के प्रतिनिधि अनंत नारायण सिंह के सानिध्य में शुक्रवार को सायं रामबाग के मुख्य द्वार पर लीला का मंचन हुआ। जन्म लेने के बाद रावण यज्ञ करता है और प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी उसे इच्छित वर मांगने को कहते हैं। रावण ने कहा हे प्रभु हमें ऐसा वर दें कि मनुष्य और वानर के सिवा कोई और उसे मार न सके। ब्रह्मा जी ने तथास्तु कहा। कुंभकरण ने भी छह मास सोने और एक दिन जागने का वर मांगा। ब्रह्मा जी लंकिनी से कहते हैं कि जब एक वानर के मुक्के से तुम घायल होकर जमीन पर गिर पड़ोगी तो समझ लेना कि राक्षस राज का अंत नजदीक आ गया है।
गाय का रूप धारण कर पृथ्वी ब्रह्मा जी के पास जाती हैं और रावण के अत्याचार की दुहाई देती है। इसके साथ ही श्री रामचरितमानस के बालकांड की चौपाइयाें के गायन के बाद लीला को एक घंटे के लिए विराम दे दिया गया। दूसरे प्रसंग में क्षीरसागर की भव्य झांकी सजाई गई।
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शान से निकली शाही सवारी, गूंजा हर-हर महादेव
रामनगर। विश्व प्रसिद्ध रामलीला की शान शाही सवारी शुक्रवार को शाम पौने पांच बजे धूमधाम से निकली। शाही बग्घी पर काशी राज के प्रतिनिधि अनंत नारायण सिंह सवार थे। शाही सवारी देखने के लिए किला रोड पर हुजूम उमड़ पड़ा। जिधर से सवारी निकली उधर का इलाका हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। अनंत नारायण सिंह हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। लीला स्थल के पास 36वीं वाहिनी पीएसी रामनगर की टुकड़ी ने अनंत नारायण सिंह को सलामी दी। इस दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
जाम में फंसा रावण, आधे घंटे देर से शुरू हुई लीला
रामनगर । रामनगर की श्रीरामलीला पहले दिन लगभग आधे घंटे देर से शुरू हुई। अनंत नारायण सिंह की सवारी ठीक चार बजकर 42 मिनट पर किले से निकल कर रामबाग पहुंची। चार बजकर 52 मिनट पर पीएसी ने उन्हें सलामी दी। तुरंत लीला शुरू होनी थी, लेकिन पता चला कि रावण की भूमिका निभाने वाला पात्र लीला स्थल पहुंचा ही नहीं। मोबाइल पर संपर्क किया गया तो पता चला कि चौक में है। लगभग 20 मिनट बाद वह रामबाग पहुंचे। साढ़े पांच बजे लीला का श्रीगणेश हुआ। जबकि लीला आरंभ होने का समय पांच बजे निर्धारित है। लीला प्रेमियों में रावण के जाम में फंसने की चर्चाएं रहीं। संवाद
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