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Rathyatra 2023: काशी में भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने के लिए उमड़े भक्त, आज रात संपन्न होगा मेला

Thu, 22 Jun 2023 09:46 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी में रथयात्रा मेले के तीसरे दिन गुरुवार दोपहर में भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने के लिए भक्तगण उमड़े। किसी ने पहिये पर जोर लगाया तो किसी ने रथ में बंधा रस्से को तान कर रथ आगे बढ़ाने की रस्म निभाई। आज रात शयन आरती के साथ तीन दिवसीय मेला संपन्न हो जाएगा। 
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वाराणसी: रथयात्रा मेले में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जगन्नाथ स्वामी नयन पथगामी भवतु मे....का भाव और कातर प्रार्थना के जरिये भक्तों ने भगवान को हृदय में विराजने की कामना की। रथयात्रा मेले के अंतिम दिन भगवान का रथ खींचते हुए हर श्रद्धालु के मन में यही भाव था कि प्रभु नयनों की राह से हमारे हृदय में विराजमान हों। हर भक्त प्रभु चरणों को स्पर्श करने की कामना से मेला क्षेत्र में पहुंचा और रथ के स्पर्श से भगवान के चरण रज की अनुभूति की।

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गुरुवार दोपहर में भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने के लिए भक्तगण उमड़े। किसी ने पहिये पर जोर लगाया तो किसी ने रथ में बंधा रस्से को तान कर रथ आगे बढ़ाने की रस्म निभाई। नाथों के नाथ से प्रेम का अटूट रिश्ता निभाकर भक्त भी भाव से भर उठे। हर कोई रथ के स्पर्श व उसकी परिक्रमा की चाह लिए रथयात्रा मेले में पहुंचा।
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गुलाब व बेला की कलियों से सजावट

दोपहर 12 बजे रथ को खींचकर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के पास विराजमान कराया गया। इसके पूर्व प्रात: 5.11 बजे पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय ने भगवान जगन्नाथ, भैया बलभद्र और बहन सुभद्रा के स्वरूपों की मंगला आरती की। इसके बाद रथ रूपी मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खुल गए।

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भगवान जगन्नाथ का श्रृंगार - फोटो : अमर उजाला
भगवान का श्वेत परिधान और बेला की कली से शृंगार किया गया। रथ के गर्भगृह में विराजमान विग्रहों की गुलाब व बेला की कलियों से सजावट की गई थी। रथ के शिखर और छतरी को हरी पत्तियों व सफेद फूलों से सजाया गया। इस्कॉन की मंडली ने किशोरी किशोर दास के नेतृत्व में चैतन्य महाप्रभु के भजनों की प्रस्तुति दी।

इससे जगन्नाथ दरबार कृष्णमय हो गया। नौ बजे भगवान को छौंका मूंग-चना, पेड़ा, गुड़ और खांड़सारी नींबू का तुलसी मिश्रित शरबत का भोग अर्पित किया गया। दोपहर में पट बंद कर दिए गए। अपराह्न तीन से चार बजे के बीच श्रृंगार एवं आरती के बाद दर्शन आरंभ हुआ। रात्रि आठ बजे आरती हुई। शयन आरती के साथ तीन दिवसीय मेला संपन्न हो जाएगा। 
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मेले में खूब बिकी नानखटाई

रथयात्रा मेले के अंतिम दिन नानखटाई की खूब बिक्री हुई। चाट एवं अन्य व्यंजनों की दुकानों व ठेलों पर भी भीड़ रही। छोटे बच्चे खिलौने खरीदने, झूला झूलने और चर्खी का आनंद लेने में मशगूल थे।
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