भगवान जगन्नाथ का श्रृंगार
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भगवान का श्वेत परिधान और बेला की कली से शृंगार किया गया। रथ के गर्भगृह में विराजमान विग्रहों की गुलाब व बेला की कलियों से सजावट की गई थी। रथ के शिखर और छतरी को हरी पत्तियों व सफेद फूलों से सजाया गया। इस्कॉन की मंडली ने किशोरी किशोर दास के नेतृत्व में चैतन्य महाप्रभु के भजनों की प्रस्तुति दी।
इससे जगन्नाथ दरबार कृष्णमय हो गया। नौ बजे भगवान को छौंका मूंग-चना, पेड़ा, गुड़ और खांड़सारी नींबू का तुलसी मिश्रित शरबत का भोग अर्पित किया गया। दोपहर में पट बंद कर दिए गए। अपराह्न तीन से चार बजे के बीच श्रृंगार एवं आरती के बाद दर्शन आरंभ हुआ। रात्रि आठ बजे आरती हुई। शयन आरती के साथ तीन दिवसीय मेला संपन्न हो जाएगा।
रथयात्रा मेले के अंतिम दिन नानखटाई की खूब बिक्री हुई। चाट एवं अन्य व्यंजनों की दुकानों व ठेलों पर भी भीड़ रही। छोटे बच्चे खिलौने खरीदने, झूला झूलने और चर्खी का आनंद लेने में मशगूल थे।