भगवान बलभद्र, सुभद्रा और बाबा जगन्नाथ ने श्वेत वस्त्रों में दर्शन दिया। श्रद्धालुओं में जहां भगवान के स्वस्थ होने की खुशी थी तो वहीं परवल के जूस का प्रसाद लेने की होड़ मची भी मची हुई थी। श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव व जय जगन्नाथ के जयघोष किया। 12 बजे बंद हुआ मंदिर दोपहर बाद तीन बजे फिर खुला तो दर्शन-पूजन का क्रम अनवरत जारी है।
दो साल बाद फिर से गुलजार होगा रथयात्रा मेला
सात वार नौ त्योहार की काशी के त्योहार भी अनोखे हैं। त्योहारों की शृंखला रथयात्रा से आरंभ हो जाती है जो कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली उत्सव के साथ पूरी होगी। रथयात्रा पर नाथों के नाथ भगवान जगन्नाथ मनफेर के लिए काशी की गलियों में निकलते हैं।
कोरोना संक्रमण के दो साल बाद रथयात्रा का मेला फिर से सजेगा और भक्तवत्सल भगवान भइया बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे। बनारस में तीन दिन तक की भगवान की यह यात्रा रथयात्रा काशी के लक्खा मेले में शुमार है। मेले के संयोजक ट्रस्टी आलोक शापुरी ने बताया कि रथयात्रा मेले का आयोजन 218 साल से अनवरत किया जा रहा है, केवल कोरोना संक्रमण काल में दो साल तक भगवान यात्रा पर नहीं निकले।