अरसा बाद गंगा दशहरा पर दुर्लभ संयोग मिलेगा। भगीरथ के तप के बाद ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र में ही गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इस बार चार जून को हस्त नक्षत्र में ही गंगा का अवतरण दिवस पड़ेगा।
उस दिन गंगा में डुबकी लगाने से मन, वचन और कर्म तीनों प्रकार से किए गए 10 प्रकार के पापों का शमन होगा। गंगा दशहरा पर काशी में स्नान के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु उमड़ेंगे। वाराह पुराण के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन हस्त नक्षत्र में गंगा ब्रह्मा के कमंडल से पृथ्वी पर आई थीं।
यह तिथि सनातन धर्मियों के लिए पापों से मुक्ति के लिए सबसे अहम और शुभ मानी जाती है। इस बार हस्त नक्षत्र शनिवार को दिन में 1:26 बजे से रविवार की सुबह 8:03 बजे तक रहेगा। इस दिन गंगा स्नान के लिए काशी में मेला लगेगा।
गंगा के दोनों किनारों पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु डुबकी लगाने के लिए पहुंचेंगे। गंगा तटों पर स्नान के लिए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। मल्लाहों ने गंगा पार रेती पर अभी से कपड़े की बाड़ से घेरकर अस्थाई चेंजिंग रूम बनाना शुरू कर दिया है।
मढ़ियों की भी सफा-सफाई कराई जा रही है। गंगा के प्रमुख स्नान घाटों दशाश्वमेध, शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट, मान मंदिर घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, मीर घाट पर गोताखोर स्नानार्थियों की निगरानी के लिए लगाए जाएंगे। ज्योतिषाचार्य बिमल जैन के अनुसार दशहरा पर 10 प्रकार के नैवेद्य, ऋतुफल, तांबूल, धूप के अलावा 10 दीप जलाकर मां गंगा की आराधना करने के पापों से मुक्ति मिलेगी।
गंगा दशहरा स्नान मंत्र:
ऊं नम: शिवायै नाराण्ययै दशहरायै गंगायै नम:
उं नमों भगवते ऐं ह्रीं ह्रीं श्रीं हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा... मंत्र के साथ पांच पुष्प अर्पित करना चाहिए।