रंगभरी एकादशी पर श्री काशी विश्वनाथ की आरती के समय में बदलाव किया गया है। 14 मार्च को होने वाले रंगभरी के उत्सव पर भगवान शिव एवं पार्वती की चल प्रतिमाओं का भव्य शृंगार किया जाएगा। शाम को सात बजे होने वाली सप्तर्षि आरती रंगभरी के दिन अपराह्न तीन बजे होगी। रात्रि नौ बजे होने वाली शृंगार भोग आरती अपराह्नन पांच बजे प्रारंभ होगी। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट रात्रि 11:30 बजे तक दर्शन के लिए खुले रहेंगे। ब्यूरो
चला हो गौरा ऊंचे पहड़वा, तोहरा के भोला बोलउले बा... की धुन गौरा के मायके में तब्दील हो चुके महंत आवास पर गूंजते रहे। बाबा के गौने की रस्म उत्सव का उल्लास शनिवार को पूरी रौ में रहा। रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ मां गौरा की विदाई कराने के लिए कैलाश से काशी आएंगे।
शनिवार को टेढ़ी नीम स्थित विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर उत्सव का रंग और भी चटख हो गया। गौरा के रजत विग्रह को संध्याबेला में हल्दी लगाई गई। महंत आवास पर गौरा के विग्रह के समक्ष सुहागिनों और गवनहिरयों की टोली ने मंगल गीत गाए। उत्सव में ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच मंगल गीत गाते हुए महिलाओं ने गौरा को ससुराल के नियम समझाए।
मांगलिक गीतों से महंत आवास गुंजायमान हो उठा। लोक संगीत के बीच-बीच शिव-पार्वती के मंगल दांपत्य की कामना पर आधारित पारंपरिक गीतों का क्रम देर तक चला। मंगल गीतों में तैयारियों पर भी चर्चा हुई। भोले बाबा के आगमन के लिए महंत आवास पर तैयारियां की जा रही हैं। ठंडई, मेवे और पकवान तैयार कराए जा रहे हैं।