रुद्राक्ष और करुंगली की माला धारण कर बाबा की चल प्रतिमा जब गौरा सदनिका पहुंची तो भक्तों ने भावविभोर होकर स्वागत किया। कुशा से निर्मित पवित्र मंडप में वेद मंत्रों के बीच महादेव को विराजमान कराया गया। पंचमेवा और विजया मिश्रित ठंडई का भोग लगा।
काशी के 51 प्रमुख मंदिरों के प्रतिनिधित्व में महंत लिंगिया शिव प्रसाद पांडेय ने महादेव और गणों की विधिवत आरती उतारी। उनके साथ पूर्व महंत कुलपति तिवारी के पुत्र व आयोजक वाचस्पति तिवारी ने परंपरानुसार विधिवत पूजन कराया। दोपहर से ही गौरा सदनिका पर पांच वैदिक ब्राह्मणों ने चार दिवसीय अनुष्ठान के क्रम में पूजन कराया।
आज शाम पांच बजे निकलेगी बाबा की पालकी यात्रा
आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि गौरा का मुख्य गौना संस्कार शुक्रवार को रंगभरी एकादशी पर संपन्न होगा। शाम को पांच बजे गौरा सदनिका पूर्व महंत आवास से बाबा और माता गौरा की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा निकाली जाएगी। सुबह माता गौरा, बाबा और प्रथमेश का विशेष पूजा होगी। भक्त दिनभर दर्शन करेंगे। शाम को पांच बजे श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के लिए पालकी यात्रा निकाली जाएगी।