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रंगभरी उत्सव का उल्लास काशी में शुरू, गीतों से गूंज उठा महंत आवास

Sun, 21 Mar 2021 08:56 PM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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महंत आवास पर गौरा का शृंगार एवं आरती। - फोटो : अमर उजाला
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रंगभरी उत्सव का उल्लास काशी में आरंभ हो गया। महंत आवास पर गीत गवना के साथ ही गौरा के गौने की रस्में निभाई जा रही हैं। चार दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत के साथ ही काशी में भी होली के रंग बिखरने लगे हैं।

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रविवार को टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास बनली भवानी दुल्हिनिया के बिदा होके जइहैं ससुरार..., शिव दुलहा बन अइहैं, गौरा के लिया जइहैं..., मंगल बेला में आए महादेव बन दुलहा और जा केससुरे सखी न भुलइहा...पारपंरिक मंगल गीतों से गूंज उठा। गौना के पूर्व के लोकाचार भी आरंभ हो गए। शाम को पं. सुशील त्रिपाठी केआचार्यत्व में पं. वाचस्पति तिवारी ने माता गौरा की प्रतिमा का षोडशोपचार पूजन किया।

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महंत आवास पर गौरा का शृंगार। - फोटो : अमर उजाला
संजीव रत्न मिश्र ने शृंगार एवं आरती उतारी। आरती भोग के बाद गवनहरियों और परिवार की महिलाओं ने मिलकर मंगल गीत गाए। माता गौरा की रजत प्रतिमा के समक्ष दीप जला कर ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच महिलाओं ने चुमावन की रस्म भी अदा की। साठी क चाउर चुमीय चुमीय...., मनै मन गौरा जलाए जब चाउर चुमाए..., गौरा के लागे ना नजरिया कजरवा लगाय द ना...जैसे पारंपरिक गीतों के गायन का क्रम रात्रि नौ बजे तक चला।

 इसके बाद सुहागिनों की अंचरा भराई की गई। महंत परिवार की महिलाओं ने गवनहरियों के आंचल में अक्षत, गुड़, हल्दी, खड़ी सुपाड़ी और दक्षिणा डाल कर उनकी विदाई की। 22 मार्च को सायं काल तेल हल्दी की रस्म निभाई जाएगी। गौरा का गवना कराने के लिए रंगभरी एकादशी की तिथि से एक दिन पूर्व 23 मार्च को बाबा का ससुराल आगमन होगा।
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