सूरत से आई खादी राजशाही पोशाक
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बुधवार शाम को सूरत से आई खादी राजशाही पोशाक व बरसाने से आए लहंगे की पूर्व महंत के आवास पर विधिवत पूजा की गई। आचार्य सुशील त्रिपाठी ने पालकी एवं राजशाही पोशाक का पूजन कराया। टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास पर गौरा के विग्रह के समक्ष सुहागिनों और गवनहिरयों की टोली ने संध्या बेला में अचल सुहाग की कामना के साथ मंगलगीत गाए।
उत्सव में ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच मंगल गीत गाते हुए महिलाओं ने गौरा को ससुराल के नियम समझाए। दूल्हे के स्वागत के लिए कौन-कौन से पकवान पकाए जा रहे हैं, सखियां पार्वती का साज शृंगार करने के लिए कैसे-कैसे सुंदर फूल चुन कर ला रही हैं, इसका भी बखान मंगलगीत में किया। लोक संगीत के बीच शिव-पार्वती के मंगल दांपत्य की कामना पर आधारित पारंपरिक गीतों का क्रम देर तक चला।
माता गौरा को विदा कराने के लिए भोले बाबा गुरुवार को ससुराल पहुंचेंगे। भोले बाबा के आगमन के लिए तैयारियां की जा रही हैं। ठंडई, मेवे और पकवान की व्यवस्था की जा रही है। तीन मार्च को रंगभरी (अमला) एकादशी पर बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती संग प्रथमेश की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है।