बनारस के मस्जिदों में रमजान की खास ‘क्लास’ चल रही है। रमजान से जुड़े कोई सवाल हों, रोजे नमाज को लेकर कोई मसला हो, इस क्लास में लोगों को उसका हल मिल रहा है। शरीयत और कुरान की आयतों की रोशनी में सवालों के जवाब आलिम दे रहे हैं और लोगों की परेशानियां दूर कर रहे हैं।
लोगों के सवाल भी बड़े अहम हैं। जैसे, सहरी अजान से कितनी देर पहले कर लेनी चाहिए? क्या बीमारी की हालत में रोजा रखना जरूरी है? इंसान सफर ही हालत में हो तो रोजा रखना जायज है। किन चीजों से रोजा मकरूह होता है? जैसे तमाम सवाल लोग इस क्लास में पूछ रहे हैं।
मस्जिद बीबी उल्फत काशी विद्यापीठ में रमजान के पहले दिन से ही यहां दोपहर डेढ़ बजे से लेकर तीन बजे तक ये क्लास चलती हैं। जोहर यानी दोपहर की नमाज के बाद नमाजी आलिम ये रमजान से जुड़े ऐसे सवालात कर रहे हैं और आलिम उनके तमाम मसायल का जवाब दे रहे हैं।
मौलाना मुबारक बताते हैं कि लोग यहां नमाज पढ़ने का सही तरीका जान रहे हैं। रोजे के हालात में उन्हें क्या करना चाहिए या नहीं उनका ये सबसे अहम सवाल होता है।
हमारी कोशिश होती है कि हम उन्हें ये बताएं कि अल्लाह ने जिस नियत से हमें एक महीने का रोजा दिया है, उसे हम सिर्फ रमजान भर नहीं बल्कि हमेशा अपनाएं।
जैसे गरीबों की भूख प्यास का एहसास करना, बुराई से दूर रहना। अल्लाह की इबादत करें, गरीबों की मदद करें, जकात दें। यही नहीं ऐसे ही तमाम मस्जिदों में नमाज के बाद लोग इमाम से मौलाना से इबादत के मद्देनजर जानकारियां हासिल कर रहे हैं।