तरह-तरह की नावें, रंग-बिरंगे हाउस बोट सजने लगे हैं। कोई पीढ़ा बनवा रहा है तो कोई बाबा के जमाने की चांदी की मढ़ाई छड़ी निकाल कर चमकाने लगा है। मगही पान की बीड़ा सजाने के साथ ही काजू-पिस्ता संग गुलाब, बेला के फूलों की ठंडाई छानने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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यह ठसक मिजाजी पांच सितंबर से दिखेगी रामनगर की विश्वविख्यात रामलीला में। रामनगर स्थित अयोध्या के मैदान से लंका मैदान तक देश-दुनिया के कई हिस्सों से राम के आदर्शों को समझने, रंग सज्जा, वस्त्र विन्यास में अपने तरह की अनूठी रामलीला देखने के लिए प्रेमी पहुंचेंगे।
रामलीला पांच सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन रावण जन्म से शुरू होगी। किले से शाही बग्घी पर सवार होकर काशिराज अनंत नारायण निकलेंगे और संतों के कंधों पर राम-सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के स्वरूप। उनके पीछे लीलाप्रेमियों का समूह चलेगा।
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रामनगर किले के पास भरत के ननिहाल से लेकर शास्त्री चौक, रामबाग के पोखरा से लेकर मोहताजखाने तक संतों की भजनानंदी टोलियां डेरा डालने लगी हैं। हर किसी के मन में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न को कंधे पर उठाने, स्पर्श करने और निहारने की ललक है।
सूर्य के अस्ताचलगामी होने से पहले ही बनारस के लीला प्रेमी छाता, छड़ी और पीढ़ा-पोथी के साथ नावों से गंगा पार होने लगेंगे। राम के चरित्र की लीलाओं के मंचन तो काशी में सौ से अधिक स्थानों पर होंगे लेकिन रामनगर की लीला की सादगी, निरालापन हर किसी के लिए खास और यादगार होगा।
धर्मशाला में तपस्वी का जीवन जीते हैं राम-सीता, लक्ष्मण
रामलीला में यही बच्चे बनेंगे राम, लक्ष्मण, भरत
- फोटो : अमर उजाला
तकनीक के इस दौर में भी रामनगर की रामलीला बिना ध्वनि विस्तारक यंत्र और लाइट की चकाचौंध के ही होती है। मशालची मशाल लेकर चलेंगे। आरती मेहताबी रोशनी में होगी। राम-सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के पात्र रोजाना संतों के कंधों पर सवार होकर लीला स्थलों पर पहुंचाए जाएंगे।
जामवंत की लंबे समय तक भूमिका करने वाले रमेश पांडेय कहते हैं कि महीने भर चलने वाली इस लीला का हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस लीला में लोग मंचन की बजाए भगवान का दर्शन करने का भाव लेकर आते हैं।
प्रातकाल उठि के रघुनाथा मातु पिता गुरु नावईं माथा
रामनगर की रामलीला के प्रमुख पात्रों के लिए लीला किसी तपस्या से कम नहीं है। राम-सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के पात्र गंगा किनारे बलुआ घाट पर धर्मशाला में दो महीने से पूर्वाभ्यास कर रहे हैं। खास बात है कि लीला पूरी होने तक लीला के ये प्रमुख पात्र घर नहीं जाते। उनसे न तो कोई बाहरी व्यक्ति मिल सकता और न तो वह इस साधना से छोड़कर कहीं जा सकते।
पं. रघुनाथ व्यास धर्मशाला में लीला के इन प्रमुख पात्रों को संवाद वाचन से लेकर अन्य आचार, विचार और संस्कार का प्रशिक्षण दे रहे हैं। चंदौली के तार गांव निवासी आठवीं के छात्र सक्षम तिवारी इस बार राम होंगे तो भदऊं चुंगी के सचिन पांडेय माता जानकी की भूमिका निभाएंगे।
रामलीला के विशेश्वरगंज के प्रांजल तिवारी लक्ष्मण की भूमिका में होंगे तो छित्तूपुर के अवनीश पांडेय भरत की भूमिका में। जबकि हरसेवानंद पब्लिक स्कूल के चौथी कक्षा के छात्र शिवा पांडेय शत्रुघ्न की भूमिका में नजर आएंगे। व्यास जी बताते हैं कि चार बजे भोर में ही सभी पात्र उठ जाते हैं। इसके बाद संवादों का पाठ आरंभ हो जाता है।
लीला के पुतलों में हंसों के जोड़े शेषनाग और मोर तैयार
रामलीला के लिए तैयारी करते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
रामबाग में रामलीला के पुतलों को अंतिम रूप देने का काम शुरू हो गया है। मछरहट्टा के राजू 20 कारीगरों के साथ दिन रात पुतलों के निर्माण में लगे हैं। क्षीर सागर की लीला के लिए शेषनाग के अलावा हंसों के जोड़े, मोर, पहाड़, हिरन, कामधेनु के पुतले तैयार हो रहे हैं। रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का निर्माण लंका के मैदान में जल्द आरंभ हो जाएगा।
रामनगर की रामलीला के लिए लंका और टाउनहॉल से चलेंगी बसें
रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला देखने जाने वाले श्रद्धालुओं की आवागमन की सुविधा को देखते हुए इस बार प्रशासन की ओर से दो नि:शुल्क बसें चलाई जाएंगी। यह दोनों बस लंका और टाउनहाल से शाम चार बजे रामनगर जाएंगी।
वहीं, रामनगर से रात नौ बजे लंका और टाउनहाल के लिए दोनों बस वापस होंगी। मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने गुरुवार को बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए टाउनहाल और लंका से दो नि:शुल्क बस पांच सितंबर से चलाने का निर्णय लिया गया है।
बीते हफ्ते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिले के दौरे पर आए थे तो उन्होंने अधिकारियों को कहा था कि रामनगर की रामलीला देखने जाने वाले श्रद्धालुओें के आवागमन और सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर कमी न होने पाए।