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हे श्रीराम! आप प्राणों के प्राण और परमात्मा हैं

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रामनगर। हे श्रीराम! आप प्राणों के प्राण हैं और परमात्मा हैं। सभी आप के बिना दुखी हैं। आप ही सुखों की खान हो और दया के निधान हो। महर्षि वशिष्ठ ने इन वचनों के साथ भगवान राम को सहज स्नेह के साथ विभूषित किया। श्रीराम मुनिवर को प्रणाम कर आश्रम को जाते हैं। भाई भरत के साथ भगवान राम के मिलन और भावुक संवाद से हर किसी की आंखें नम हो गईं। रामनगर की रामलीला के 13वें दिन मंगलवार को वशिष्ठ सभ, चित्रकूट में जनक आगमन तथा सभा आदि लीला का भावपूर्ण मंचन रामबाग पोखरा में हुआ। लीला स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
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मंगवार को अयोध्या कांड 252 से 306 दोहे तक के प्रसंग का मंचन हुआ। चित्रकूट में राम को मनाने के लिए भरत ने भागीरथ प्रयास किया। हर प्रकार से राम को मनाने का प्रयास किया। भरत अपनी मां की करनी पर ग्लानि करते हैं तो गुरु वशिष्ठ और राम उन्हें समझाते हैं। भरत कहते हें कि राजतिलक की बस सामग्री साथ लाया हूं। इसे सुफल किजिए मैं लक्ष्मण और शत्रुघभन को वापस भेजकर आपके साथ वन चलूंगा। आप माता सीता के साथ अयोध्या लौट जाइए। हम तीनों भाई आपके बदले वन जाएंगे। यह देखकर देवता असमंजस में पड़ जाते हैं तभी चित्रकूट में राजा जनक भी पहुंचते हैं। सीता को वन की कुटिया में देखकर वह व्याकुल हो जाते हैं। गुरु वशिष्ठ उन्हें समझाते हैं। जनक की पत्नी सुनयना अपनी पत्नी सीता को गले लगाती हैं। रात बीत जाती है और भगवान की आरती के बाद लीला को विश्राम दिया गया।
शिव पार्वती संवाद और नारद मोह का हुआ मंचन
रोहनिया। रामलीला मे आज शिव पार्वती संवाद व नारद मोह का मंचन किया गया। माता पार्वती शंकर जी से प्रश्न करती हैं कि क्या यही दशरथ पुत्र श्री राम हैं या कोई और हैं जिसके नाम का आप निरंतर जाप करते हैं। भगवान शंकर ने ध्यान करते भगवान श्री राम की लीला का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। भगवान के जन्म के कारण में नारद द्वारा विष्णु को श्राप देने की बात सुनकर गिरिजा चकित होती हैं।
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स्वर्गवासी पिता के वचनों को अधूरा छोड़ दिया तो संसार क्या कहेगा
चिरईगांव। जाल्हूपुर रामलीला में गुरु वशिष्ठ, भरत, शत्रुघभन, माता कौशल्या, सुमित्रा, कैकेयी व निषादराज व नगर वासी प्रभु श्री राम को समझाते हैं। गुरु वशिष्ठ ने महाराज दशरथ के स्वर्गवास की बात बताई तो श्री राम, लक्ष्मण, सीता सहित सबकी आंखें नम हो गईं। गुरु वशिष्ठ ने श्री राम से कहा आप अब अयोध्या लौट चलें। आपके बगैर अयोध्या सूनी हो गई है। आपके वनगमन के बाद अयोध्या में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। भगवान श्री राम ने कहा आप की जो आज्ञा गुरुदेव, मैं आपके आदेश का पालन करूंगा। यदि मैंने स्वर्गवासी पिता के वचनों को अधूरा छोड़ दिया तो संसार क्या कहेगा। इसलिए मुझे पिता के वचनों का पालन करने दें। अयोध्या की जिम्मेदारी मेरा भाई भरत संभालेगा। भगवान कीआरती होने के उपरांत रामलीला का विश्राम दिया जाता है।
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