राज्याभिषेक के बाद भगवान राम ने अपनी प्रजा को दिया उपदेश
राज्याभिषेक के बाद भगवान राम भाइयों के साथ हाथी पर चढ़कर उपवन विहार गए। यहां उन्होंने अपनी प्रजा को उपदेश देते हुए कहा, अगर मुझसे कोई अनीति हो जाए तो सारे भय छोड़कर मुझे रोकना। मनुष्य का तन बड़े भाग्य से मिलता है। इसे पाकर जो अपने परलोक को नहीं संवारता, वह अंत में दुख ही पाता है।
शुक्रवार को भाइयों और हनुमान के साथ उपवन विहार के लिए गए श्रीराम को देखकर शुभ अवसर जान वहां सनकादिक उनसे मिलने पहुंचे। उन्हें देखकर श्रीराम ने उन्हें प्रणाम किया। उन्हें पीतांबर बिछाकर बैठाया। उनसे कहा कि आप के दर्शन पाकर मैं धन्य हुआ। यह सुनने के बाद सनकादिक भगवान का गुणगान और स्तुति करके चले गए। तभी वहां हनुमान ने उन्हें बताया कि भरत आपसे कुछ जानना चाहते हैं, लेकिन पूछने पर संकोच कर रहे हैं। श्रीराम भरत से मन का संकोच छोड़कर अपनी बात कहने को कहते हैं। उनकी बात सुनकर श्रीराम ने संत और असंत के बारे में विस्तार से बताया। इसके बाद गुरु वशिष्ठ ने श्रीराम से आग्रह करके उनसे अपने लिए चरण कमल में प्रीति होने का वर मांगा। इस दौरान वहां नारद पहुंचे और उनकी स्तुति करने के बाद ब्रह्मलोक चले गए। इसके बाद श्रीराम अपने भाइयों समेत हाथी पर चढ़कर उपवन बिहार से अयोध्या लौट गए।