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Ramnagar ki ramleela: चार मिनट की आरती में उमड़े डेढ़ लाख श्रद्धालु, काशी ने उतारी रघुकुल नायक की आरती

Sat, 28 Oct 2023 02:44 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

अयोध्या में माता कौशल्या ने राम दरबार की आरती उतारनी शुरू की। चार मिनट की आरती की लीला का आकर्षण ऐसा कि डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु मैदान में जमे हुए थे।
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Ramnagar ki ramleela: चार मिनट की आरती में उमड़े डेढ़ लाख श्रद्धालु - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अयोध्या का मैदान। सुबह के 5:45 बजे। पूरब से सूरज की लालिमा ने जैसे ही दर्शन दिए। अयोध्या में माता कौशल्या ने राम दरबार की आरती उतारनी शुरू की। चार मिनट की आरती की लीला का आकर्षण ऐसा कि डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु मैदान में जमे हुए थे। भगवान राम के दरबार की अनुपम छवि को हृदय में बसाने की चाह लिए श्रद्धालु मध्य रात्रि से ही लीला स्थल पर पहुंचने लगे थे।

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शुक्रवार की भोर में काशी का जनसमुदाय श्रीराम के राज्याभिषेक की भोर की आरती का हिस्सा बनने के लिए उमड़ पड़ा। जनसैलाब उमड़ा तो आस्था का रेला गांव, गली और मोहल्लों से होता हुआ रामलीला स्थल पर जम गया। हर जन के मन में सियाराम की छवि और होठों पर जय सियाराम... का जयघोष। राम नाम की भक्ति में पगे हुए श्रद्धालु एकटक मंच की ओर निहार रहे थे। पूरब दिशा में जैसे ही सूर्य की लालिमा ने दस्तक दी तो जनता भी हर्ष से भर उठी। आरती के लिए तड़के लगभग 5.40 बजे काशीराज परिवार के अनंत नारायण सिंह रामनगर दुर्ग से दरबारियों के साथ पैदल चलकर लीला स्थल अयोध्या मैदान पहुंचे। लगभग 5.45 बजे भगवान भाष्कर ने जैसे ही अपनी आंखें खोलीं, माता कौशल्या ने अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान श्रीराम व सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और श्रीराम के चरणों में नतमस्तक भक्त शिरोमणि हनुमान की आरती उतारी। लाल, सफेद महताबी रोशनी के बीच चार मिनट के इस आरती झांकी की अनुपम छटा को उपस्थित विशाल जनसमूह ने अपने मानस पटल पर अंकित कर लिया। अनंत नारायण सिंह ने भी खड़े होकर राम राज्याभिषेक की आरती का दर्शन कर परंपरा का निर्वहन किया। हर-हर महादेव के उदघोष के बीच अनंत नारायण सिंह आरती के बाद हवाखोरी के लिए निकले। वहीं श्रीराम को कंधे पर उठाए बजरंग बली व सीता, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न भक्तगणों के कंधे पर बैठकर बाजार भ्रमण के प्रसंग के लिए लीलास्थल से बलुआघाट स्थित धर्मशाला पहुंचे।

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रामनगर की रामलीला - फोटो : अमर उजाला
राज्याभिषेक के बाद भगवान राम ने अपनी प्रजा को दिया उपदेश
राज्याभिषेक के बाद भगवान राम भाइयों के साथ हाथी पर चढ़कर उपवन विहार गए। यहां उन्होंने अपनी प्रजा को उपदेश देते हुए कहा, अगर मुझसे कोई अनीति हो जाए तो सारे भय छोड़कर मुझे रोकना। मनुष्य का तन बड़े भाग्य से मिलता है। इसे पाकर जो अपने परलोक को नहीं संवारता, वह अंत में दुख ही पाता है।
शुक्रवार को भाइयों और हनुमान के साथ उपवन विहार के लिए गए श्रीराम को देखकर शुभ अवसर जान वहां सनकादिक उनसे मिलने पहुंचे। उन्हें देखकर श्रीराम ने उन्हें प्रणाम किया। उन्हें पीतांबर बिछाकर बैठाया। उनसे कहा कि आप के दर्शन पाकर मैं धन्य हुआ। यह सुनने के बाद सनकादिक भगवान का गुणगान और स्तुति करके चले गए। तभी वहां हनुमान ने उन्हें बताया कि भरत आपसे कुछ जानना चाहते हैं, लेकिन पूछने पर संकोच कर रहे हैं। श्रीराम भरत से मन का संकोच छोड़कर अपनी बात कहने को कहते हैं। उनकी बात सुनकर श्रीराम ने संत और असंत के बारे में विस्तार से बताया। इसके बाद गुरु वशिष्ठ ने श्रीराम से आग्रह करके उनसे अपने लिए चरण कमल में प्रीति होने का वर मांगा। इस दौरान वहां नारद पहुंचे और उनकी स्तुति करने के बाद ब्रह्मलोक चले गए। इसके बाद श्रीराम अपने भाइयों समेत हाथी पर चढ़कर उपवन बिहार से अयोध्या लौट गए।
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