रामनगर। मासूम फरदीन अपने अब्बू की आर्थिक स्थिति खराब देख उन्हें हमेशा संबल देता था। उसकी बातों को यादकर उसके अब्बू मुमताज और अम्मी परवीन बिलख रही थी। मुमताज ने बताया कि हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। बड़ी मुश्किल से परिवार की गुजर-बसर हो पाती है। फरदीन हमेशा हिम्मत बढ़ाता था। कहता था कि अब्बू घबराइये नहीं। बड़ा होकर मैं सब ठीक कर दूंगा। कहता था कि अपनी तीनों बहन का निकाह धूमधाम से कराऊंगा। ना जाने किसकी नजर लग गई और फरदीन अपनी बातों को याद करने के लिए हमें छोड़कर हमसे बहुत दूर चला गया। फरदीन की तीनों बहनें बेसुध दिखीं। फरदीन के मामा सफी खान की हालत रोते-बिलखते पागलों जैसी हो गई है। मुमताज काशी राजपरिवार की कृष्णा प्रिया के यहां काम करते हैं। कृष्णा प्रिया ने मुमताज के घर अपना स्टाफ भेजकर दुख जताया और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
लकी के लिए ही तो दुबई आए थे अब्बा, अब यहां क्या करें
रामनगर। वाजिदपुर निवासी लकी के पिता मोहम्मद नियाज दुबई में काम करते हैं। शुक्रवार को नियाज के पिता मोहम्मन रेयान खान अपने बेटे से पोते की मौत की बात छिपाते रहे। हालांकि बहुत देर तक रेयाज संयम नहीं रख पाए और बिलखते हुए बेटे से मासूम पोते की मौत की बात फोन पर साझा कर दिए। नियाज काफी देर तक चुप रहे। इसके बाद उन्होंने कहा कि अब्बा हम तो लकी की बेहतरी के लिए ही दुबई आए थे। अब भला यहां रुककर क्या करेंगे? उधर, लकी की मां रजिया बेगम घर के एक से दूसरे कमरे और फिर बाहर जाकर लकी को आवाज दे रही थीं। तौसीफ, रिजवान और सैफ के मां-बाप और भाई-बहनों की हालत भी कुछ ऐसी ही थी। किसी को समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर क्या से क्या हो गया और कैसे खुद को समझाएं।
लॉकडाउन में टोटो चलाना छूटा तो व्यस्त रहता था मोबाइल में
वाराणसी। कक्षा आठ पास तौसीफ जीवकोपार्जन के लिए टोटो चलाता था। इसके साथ ही वह मोबाइल और सोशल मीडिया का अच्छा जानकार था। परिजनों ने बताया कि लॉकडाउन में टोटो चलाना छूटा तो तौसीफ दिन भर मोबाइल में ही व्यस्त रहता था। ईद पर भी वह कई सारे टिक टॉक वीडियो बनाया था। हालांकि तौसीफ के गंगा में डूबने के साथ ही उसका मोबाइल भी डूब गया। पिता रफीक और परिजनों का कहना था कि तौसीफ घर आने पर अपनी वीडियो बनाने वाली शैली में ही बात करता था। न जाने क्या से क्या हो गया है। उधर, इलाके के किशोरों ने बताया कि वारीगढ़ही निवासी फरदीन और वाजिदपुर सीवान निवासी लकी दोस्त थे। शुक्रवार को तौसीफ के साथ फरदीन को भी गंगा घाट की ओर जाते देख कर लकी उन सबके साथ शामिल हो गया था।
सिपहिया घाट के समीप पीपल के पेड़ से लटक कर कई लोग दे चुके हैं जान
वाराणसी। रामनगर कस्बे के लोगों के बीच पांच बच्चों के गंगा में डूबने की घटना को लेकर शनिवार को भी जबरदस्त चर्चा रही। लोगों का कहना था कि सिपहिया घाट के किनारे पीपल का एक पेड़ है। उसके सहारे लटककर कई लोग अब तक जान दे चुके हैं। कई तरह की चर्चाओं के कारण ही सिपहिया घाट पर कोई भी स्नान करने नहीं जाता है। उधर, कई लोगों का यह भी कहना था कि सिपहिया घाट की ओर से सही तरीके से रेत हटाई जानी चाहिए। रेत न हटाए जाने के कारण ही यहां कहीं बहुत गहराई है तो कहीं सुरंग जैसा है और यहां नहाने वाले डूब जाते हैं। कुछ इसी तरह की अलग-अलग चर्चाओं का सिलसिला रामनगर कस्बे की दुकानों और अड्डों पर दिन भर जारी रहा।
बसपा ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने गंगा में डूबे बच्चों की मौत पर दुख जताया। उनके परिवार वालों से मुलाकात की। साथ ही प्रदेश सरकार से पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मंत्री रघुनाथ चौधरी, जिलाध्यक्ष नवीन भारत, डॉ. विनोद कुमार, अरुण जायसवाल, सुभाष साहनी आदि शामिल रहे।