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चंद्रयान-2 ने मन हर्षाया तो गंगा की पीड़ा ने चेताया

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चंद्रयान-2 ने मन हर्षाया तो गंगा की पीड़ा ने चेताया
- चेतगंज की नक्कटैया में अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद सजी कश्मीर की झांकी
- शूर्पणखा की कटी नाक तो वह पहुंची खर-दूषण के पास
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। सात वार नौ त्योहार की नगरी काशी के लोग गुरुवार को चेतगंज की नक्कटैया के साक्षी बने। मलदहिया से लेकर चेतगंज तक सतरंगी रोशनी में नहाई गलियों में भीड़ का रेला उमड़ा। नक्कटैया की पैगामी झांकियों ने चंद्रयान-2 के माध्यम से देश के गौरव का प्रदर्शन किया गया तो अनुच्छेद 376 की समाप्ति का जश्न भी मनाया।
गंगा की दशा दिखाकर प्रदूषण के खतरों से चेताया। राष्ट्रभक्ति और नारी सशक्तीकरण से पगे प्रसंगों ने हर किसी को आकर्षित किया। प्रभु श्रीराम की लीला में उनके जीवन से जुड़े विभिन्न लाग-विमानों के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला और देवाधिदेव महादेव की झांकी भी सजी।
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132 सालों की परंपरा के अनुसार लक्ष्मण ने तलवार के वार से शूर्पणखा की नाक काट ली। इसके साथ ही पूरा क्षेत्र जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। गुस्से में भरी हुई शूर्पणखा अपने भाइयों के पास पहुंची। खर-दूषण ने जब अपनी बहन पर हुए इस अत्याचार की कहानी सुनी तो वह गुस्से से आगबबूला हो गए। वह राम-लक्ष्मण से बदला लेने के लिए सेना के साथ निकल पड़े। सेना के रूप में लाग-विमान और विभिन्न स्वांग पारंपरिक मार्ग से गुजरते रहे। लीला और मेला प्रेमी उल्लास व उमंग के सागर में रात भर गोते लगाते रहे।
सजे-संवरे हर उम्र के लोग उल्लास और उमंग से भरे खिलखिलाते माहौल में गुजरते हुए नक्कटैया लीला देखने के लिए पहुंचते रहे। लाउडस्पीकर पर रामधुन मेला क्षेत्र में गूंजती रही। पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में डूबा रहा। लीला में धार्मिक प्रसंगों की झांकियों, स्वांग और लाग-विमान संग ज्वलंत समस्याओं पर आधारित स्वरूपों को हर किसी ने सराहा।
इनसेट
जगमम हो उठीं राहें
मलदहिया से पिशाचमोचन, लहुराबीर, रामकटोरा, चाउरछटवा, हबीबपुरा होते हुए चेतगंज की गलियांतरह-तरह की आकर्षक लाइटों से जगमगाती रहीं। करीब चार किलोमीटर के दायरे में फैले मेला क्षेत्र में जगह-जगह सजी दुकानों पर लोगों की भीड़ रही। कहीं खाना और खिलौने तो कहीं मिट्टी का गुल्लक। रेवड़ी-चूड़ा व अमावट की मिठास-खटास में चाट-गोलगप्पे का चटखारा भी खूब लगा।
लाग-विमान का मार्ग
नक्कटैया में शामिल लाग-विमान मलदहिया से कबाड़ी मार्केट, पिशाचमोचन होते हुए चेतगंज थाने पर पहुंचे, जहां औपचारिक उद्घाटन के बाद लहुराबीर से वंदना होटल होते हुए हनुमान मंदिर, फि र मंदिर से बागबरियार सिंह, चेतगंज हनुमान मंदिर से सीधे बेनियाबाग पहुंचे। वहां से वापस मुड़कर चेतगंज से हबीबपुरा होते हुए मुंशी मथुरा रोड से सिटी एसपी कार्यालय के पास मुड़कर रथ के निकट पहुंच समाप्त हुआ। तकरीबन 50 झांकियों के अलावा ऊंट, घोड़े और देवी मुखौटा पहने तलवारबाजी करते कलाकारों से मेला क्षेत्र रात भर जागा और उत्सव मनाता रहा। इस दौरान अजय गुप्ता, बाबा महेंद्र निगम, बांकेलाल, भोलानाथ, तनुज पांडेय, पवन श्रीवास्तव, कैलाश यादव मौजूद रहे।
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हिचकोले खाते हुए बढ़े लाग विमान
वाराणसी। मेला क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत नहीं होने से लाग विमान हिचकोले खाते हुए आगे बढ़ रहे थे। कहीं-कहीं सड़क के गड्ढों से मेले में घूमने वाले भी गिरते-गिरते बचे। नक्कटैया मेले में प्रशासनिक अनदेखी के प्रति स्थानीय लोगों के अलावा आयोजकों में भी रोष था।
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