शरद पूर्णिमा से आरंभ होकर मार्गशीर्ष प्रतिपदा को लीला पूर्ण होती है। वर्तमान लीला रामचरित मानस के आधार पर होती है। मणिकर्णिका की रामलीला का प्रारंभ 17वीं शताब्दी में बाबा शिवदत दुबे ने किया था। रामलीला भवन मणिकर्णिका घाट मोहल्ले में है। इसके अलावा रामलीला का ब्रह्मनाल स्थित भवन स्व गिरजा देवी ने रामलीला समिति को दान में दिया था।
दो सौ साल पुराना है मुकुट
रामलीला में इस्तेमाल होने वाले स्वरूपों के मुकुट चांदी और जरी के काम वाले हैं यह लगभग दो सौ साल पुराने हैं। काशी के मानस मंदिर के उद्घाटन पर निकाली गई शोभायात्रा में रामदरबार की झांकी मणिकर्णिका रामलीला ने प्रस्तुत की थी। इस अवसर पर रतनलाल सुरेका ने पांच मुकुट, चार कोट, जानकी जी की साड़ी और हनुमान जी का वस्त्र दान किया था।