वाराणसी। रमजान के तीस रोजे पूरे होने के साथ रविवार की शाम ईद के चांद के दीदार के साथ फिजा में ईद मुबारक की सदा गूंज उठी। घर में लोगों ने एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी तो सोशल मीडिया के जरिये भी लोगों में ईद के चांद होने की खुशी एक दूसरे से साझा की। उधर रुय्यत कमेटी ने शनिवार को ही एलान कर दिया था कि रमजान के तीस रोजे रविवार को पूरे होंगे और ईद सोमवार को मनाई जाएगी। इस लिहाज से ईद की तैयारी को रविवार को अंतिम रूप देने में लोग घरों में लगे रहे।
यूं तो लॉक डाउन की वजह से ईद की और चांद रात की जो रौनक होती है, न वैसी रौनक बाजारों में देखने को मिली और ना ही इबादतगाहों में। पूरा तीस दिन का रोजा लोगों ने घरों में इबादत के साथ गुजारा। सोमवार को ईद पर भी कमोबेश वैसा ही नजारा होगा। मस्जिदों और ईदगाहों में सामूहिक ईद की नमाज नहीं होगी। इमाम और इंतेजामिया कमेटी के चार से पांच लोग ही ईद की नमाज अदा करेंगे। ऐसा पहली बार होगा जब ईदगाहों और मस्जिदों में ईद के दिन न तो लोगों का हुजूम होगा और न ही लोग एक दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी सकेंगे। फिलहाल तीस रोजों के बदले अल्लाह के इस तोहफे को लोगों ने दिल से कुबूल किया है और सादगी के साथ मनाने का फैसला लिया है। फिलहाल चांद के दीदार के साथ ही घरों में सेवइयां वगैरह बनाने में महिलाएं जुटी रहीं। बच्चे भी ईद को लेकर खुश नजर आए, लेकिन उन्हें इस बात सालती रही कि वो ईदगाह जाकर नमाज नहीं पढ़ पाएंगे और ईद के मेले की खुशी नहीं मना पाएंगे।
मुफ़्ती-ए-शहर मौलाना बातिन नोमानी ने लोगों से अपील की है कि ईद की खुशियां बेहद सादगी से मनाएं। प्रशासन के नियमों का पूरा पालन करें। सोशल डिस्टेनसिंग और लॉक डाउन का पूरा ख्याल रखें।
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सुबह साढ़े छह बजे से साढ़े दस बजे तक अदा होगी नमाज
वाराणसी। यूं तो ईद की नमाज ईदगाहों और मस्जिदों में नहीं होनी है, लेकिन चार से पांच लोग सोशल डिस्टेनसिंग का पालन करते हुए नमाज अदा करेंगे। ईद की नमाज का वक्त सुबह साढ़े छह बजे से शुरू होगा। अहले हदीस की ईद की नमाज साढ़े छह बजे से शुरू होकर आठ बजे तक होगी। वही सुन्नी और शिया जमात की नमाज का वक्त अलग अलग मस्जिदों में साढ़े सात बजे से लेकर साढ़े दस बजे तक तय है।
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नहीं दिखी चांद रात की रौनक
वाराणसी। ईद के चांद रात की रौनक की बात ही कुछ और हुआ करती है। ईद की तैयारियां 15 रमजान से ही शुरू हो जाती हैं, लेकिन फिर भी चांद रात तक कुछ न कुछ खरीदारी बची ही रह जाती थी। चांद रात के दिन बाजार ही नहीं मुस्लिम इलाके भी पूरी रात गुलजार हुआ करते थे। लेकिन इस बार कोरोना और लॉकडाउन की वजह से वो रौनक बेनूर रहा। चांद रात के दिन रविवार होने की वजह से भी लोग मायूस रहे। बाजार और मुस्लिम इलाके जो चाँद रात के दिन चकाचौंध रहा करते थे, वहां चाँद रात के दिन वीरानी सी छाई हुई थी।