जिले के पौराणिक स्थल सीतामढ़ी में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी पर सोमवार को लवकुश जन्मोत्सव रामायण मेले में 90 हजार के अधिक शृद्धालु पहुंचे। सुबह से शुरू हुआ मेला देर शाम तक जारी रहा।
रामायण मेला को लेकर गंगा तट, महर्षि वाल्मीकि आश्रम, श्री सीता समाहित स्थल मंदिर, बड़े हनुमान मंदिर, श्री सीता धाम मौनी बाबा आश्रम, उड़िया बाबा आश्रम और बाबा दधवासा नाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। आस्थावानों ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर लवकुश, राम-सीता, महर्षि वाल्मीकि के दर्शन-पूजन किया। मेले में सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। गंगा घाट पर जल पुलिस, महिला पुलिस के साथ गोताखोर की तैनाती रही।
मेला में रंग बिरंगी दुकाने मेलार्थियों को आकर्षित करती रहीं। बड़ों ने झूले का आनंद लिया तो बच्चों ने काठ घोड़े, एयर बैग झूले पर धमाल मचाया। चाट-फुलकी, छोले, चाऊमीन, बर्गर, चोटहिया जलेबी और सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ लगी रही। जिलाधिकारी विशाल सिंह ने मेला क्षेत्र का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और किसी भी स्तर पर चूक न होने का निर्देश दिया।
महिलाओं ने किया सीता केश और सीतावट का पूजन
श्री सीता समाहित स्थल मंदिर परिसर में विद्यमान ''सीता केश वाटिका'' में सुहागिन महिलाओं ने श्री माता सीता के केश का दर्शन-पूजन कर विधिवत श्रृंगार किया और लाल चुंदरी अर्पित कर अपने अमर सुहाग की कामना की। मान्यता है कि माता सीता केश का श्रृंगार पूजन करने से सुहाग अक्षय होता है। इसी तरह गंगा तट पर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम मंदिर परिसर में त्रेतायुगीन ''सीतावट'' का श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर रक्षा सूत्र अर्पित किया। मान्यता है कि इस महावृक्ष को माता सीता जी ने अपने कर कमलों से गंगा तट पर आरोपित किया था। इसी वृक्ष के नीचे बैठ कर मां सीता पूजन पाठ किया करती थीं। यह महावृक्ष अक्षय पुण्य प्रदाता है।