बनारस के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब कोई नाटक प्रदर्शनों का शतक लगाने जा रहा है। राम की शक्तिपूजा का पहला प्रदर्शन पांच फरवरी 2013 को नागरी नाटक मंडली प्रेक्षागृह में हुआ था। यह प्रस्तुति पिछले दस वर्षों से जीवित, सक्रिय और प्रवाहमान है। प्रस्तुति का नाट्यालेख स्व. डॉ. शकुंतला शुक्ल ने तैयार किया था। प्रस्तुति का संगीत पूरी तौर पर बनारस घराने के शास्त्रीय संगीत में निबद्ध है। 2012 में डॉ. शकुंतला शुक्ल, व्योमेश शुक्ल, जेपी शर्मा और डॉ. आशीष मिश्र के समूह ने कई महीनों की कड़ी मेहनत से इसे संभव किया था। जेपी शर्मा और आशीष मिश्र संगीत निर्देशक हैं। भारत के प्रायः सभी प्रमुख नाट्य समारोहों, उत्सवों और कला-केंद्रों में इसका मंचन हो चुका है।
राम की शक्तिपूजा के निर्देशक व्योमेश शुक्ल को 2017 में निर्देशन के लिए और राम की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री स्वाति को 2021 में केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी का उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार दिया गया है।
राम की शक्ति पूजा में पहले मंचन से ही राम और लक्ष्मण की भूमिका लड़कियां ही निभाती हैं। असल में यह प्रयोग बनारस की रामलीलाओं की ‘काउंटर पॉलिटिक्स’ है, जहां सदियों से सीता की भूमिका लड़के ही करते आ रहे हैं। इस नाटक में बनारस की सदियों पुरानी रामलीलाओं के बहुत से तत्वों का प्रयोग किया गया है।
गौरव, अभिनंदन और चुनौती का क्षण है क्योंकि विश्वनाथ मंदिर आस्था का केंद्र तो है ही, बनारस की सदियों पुरानी सभ्यता और संस्कृति का नाभिक भी है। अपनी नाट्य प्रस्तुति के साथ वहां पहुंचना हमारे लिए संसार का सबसे बड़ा सम्मान है। - व्योमेश शुक्ला, अध्यक्ष, रूपवाणी