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BHU के नए कुलपति बने जेएनयू के प्रो. राकेश भटनागर, चार माह से खाली था पद

Sat, 24 Mar 2018 02:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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राकेश भटनागर
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बीएचयू को आखिरकार चार माह बाद नया कुलपति मिल गया। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के मालीक्यूलर बायोलॉजी एंड जेनेटिक इंजीनियरिंग लैब्रोटी के प्रोफेसर राकेश भटनागर बीएचयू के नये कुलपति नियुक्त हो गए। 
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राष्ट्रपति और यूनिवर्सिटी के विजिटर रामनाथ कोविंद ने 26 मार्च को अपने काशी के पहले दौरे के तीन दिन पहले जेएनयू के प्रो. राकेश भटनागर की नियुक्ति कर इस पद के लिए चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है।

इस आशय का ई-मेल गुरुवार देर शाम बीएचयू प्रशासन को प्राप्त हो गया। इसके पहले राकेश भटनागर कुमायू विश्वविद्यालय नैनीताल में कुलपति और जेएनयू में अलग-अलग प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी का निर्वहन कर चुके हैं।
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बता दें कि विश्वविद्यालय में 26 नवंबर 2017 को कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी का कार्यकाल खत्म होने के बाद से ही नए कुलपति की नियुक्ति को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थी। विश्वविद्यालय के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय को मेल मिल चुका है। 
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भटनागर की नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण

बीएचयू
23 सितंबर, 2017 को परिसर में छेड़छाड़ के विरोध में आंदोलित छात्राओं पर लाठीचार्ज के मामले के तूल पकड़ने पर तत्कालीन कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी को छुट्टी पर भेज दिया गया था। इसके बाद 26 नवंबर, 2017 को उनका तीन साल का कार्यकाल भी खत्म हो गया।

प्रो. भटनागर की नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह फरवरी, 2016 में जेएनयू में बहुचर्चित भारत विरोधी नारेबाजी मामले की जांच कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। प्रो. भटनागर को सख्त मिजाज का माना जाता है।

वामपंथी विचारधारा का बड़ा केंद्र माने जाने वाले जेएनयू से महामना की बगिया में प्रो. भटनागर की नियुक्ति को भी अलग तरह से देखा जा रहा है। यही नहीं, दो दिन पहले ही केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेडकर ने बीएचयू समेत देश के 52 विश्वविद्यालयों को स्वायत्तशासी बनाए जाने की घोषणा भी की थी।

प्रो. भटनागर की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब छात्राओं पर लाठीचार्ज मामले की जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस वीके दीक्षित की जांच रिपोर्ट में प्रो. त्रिपाठी को क्लीनचिट मिलने का दावा किया जा चुका है। हालांकि मामले की की मजिस्ट्रेटी जांच और क्राइम ब्रांच की जांच का नतीजा अब तक सामने नहीं आया है।

सर सुंदरलाल अस्पताल में पिछले साल 6-7 जून में एक दर्जन से अधिक मरीजों की मौत के मामले में निर्णायक रिपोर्ट नहीं आई है। यही नहीं, प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में की गई नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बीच परिसर में आए दिन किसी न किसी मुद्दे पर आंदोलन हो रहा है।   
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ये होंगी प्रमुख चुनौतियां 

bhu
- परिसर को अराजकता से मुक्ति दिलाकर शांति का माहौल बनाना
- छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं की मॉनीटरिंग
- छात्र-छात्राओं से विश्वविद्यालय प्रशासन का तालमेल बनवाना
- विश्वविद्यालय में आपसी गुटबाजी की राजनीति से दूर रहना
- नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने के साथ ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना
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