राजघाट पुल पर मची भगदड़ में मारे गए लोगों को राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली इमदाद नौकरशाहों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। उधर, केंद्र सरकार की ओर से जारी धनराशि जिला प्रशासन को मिल गई है। इस हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी। केंद्र सरकार ने मृतकों के परिवारी जन को दो-दो लाख और राज्य सरकार ने पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी। इस बाबत राज्य सरकार अभी औपचारिकताएं पूरी करने में ही लगी हुई है।
जय गुरुदेव के उत्तराधिकारी पंकज बाबा की शोभायात्रा के दौरान 15 अक्तूबर को राजघाट पुल पर भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें एक व्यक्ति वाराणसी का भी था। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हादसे में मारे गए लोगों के परिवार को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की थी। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मारे गए लोगों के परिवार को दो-दो लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की गई थी। जिला प्रशासन ने मारे गए लोगों और घायलों का विस्तृत ब्यौरा मुख्यमंत्री कार्यालय और पीएमओ को भेज दिया था। पीएमओ के अधिकारियों ने पत्र मिलने के बाद ही मारे गए लोगों के परिवार के जिम्मेदार सदस्य का खाता नंबर मांगा था।
प्रशासनिक लापरवाही का हाल यह है कि जिला प्रशासन इनमें से केवल 12 परिवारों का ही खाता नंबर जुटा पाया। खाता नंबर मिलने के बाद औपचारिकताएं पूरी कर पीएमओ ने 12 लोगों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये का चेक भेज दिया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, दस जनपथ का चेक जिला प्रशासन को शुक्रवार को प्राप्त हो गया।
वहीं राज्य सरकार की ओर से अब तक पीड़ितों के खाता नंबर की जानकारी ही नहीं मांगी गई है। अफसरों ने भी इस संबंध में कोई पहल नहीं की। घायलों को इलाज के लिए न तो केंद्र और न ही प्रदेश सरकार ने अब तक कोई मदद की है। वहीं, घटना की जांच के लिए प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था। सूत्रों की मानें तो अब तक आयोग के समक्ष किसी भी अधिकारी का बयान तक दर्ज नहीं हुआ है।