आजमगढ़ के सगड़ी तहसील क्षेत्र के उर्दिहां गांव निवासी समाजसेवी रामसकल पटेल ने समाज से दहेज प्रथा को खत्म करने का बीड़ा उठाया है। शायद यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष वह 501 जोड़ों का दहेज रहित सामूहिक विवाद संपन्न कराते हैं।
वर्ष 2001 से शुरू हुआ रामसकल का यह कारवां साल-दर-साल जारी है। दहेज रहित विवाह के अलावा रामसकल ने अन्य कई ऐतिहासिक कार्य अपने क्षेत्र के लिए किया है। जिसके लिए लोग इन्हें ताउम्र लोग उन्हें याद करते रहेंगे।
रामसकल पटेल ने बताया कि उनका घर सगड़ी तहसील क्षेत्र के उर्दिहां गांव में स्थित है। यह पूरा इलाका काफी पिछड़ा और अशिक्षित था। इन बातों को ध्यान में रखते हुए रामसकल ने वर्ष 1956 से समाजसेवा का वीणा उठाया।
क्षेत्र को शिक्षित करने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 1967 में एक इंटर कालेज की स्थापना की। जनसहयोग से स्थापित इस कालेज के भवन निर्माण के लिए धन कम पड़ने पर वर्ष 1970 में वे सिंगापुर चले गए। वहां के लोगों से मिलकर चंदा इकट्ठा कर वापस लौटे और भव्य स्कूल भवन तैयार करवाया।
जहां से आज भी क्षेत्र के तमाम बच्चे शिक्षा ग्रहण कर निकले और शीर्ष पदों पर नौकरी कर रहे हैं। विद्यालय का भवन बनकर तैयार हो जाने के बाद रामसकल ने क्षेत्रीय लोगों के बेहतर इलाज के लिए अस्पताल के स्थापना की शुरूआत की और वर्ष 1976 में अपने गांव में आरोग्य धाम चिकित्सालय की नींव रखी और उसे तैयार करवाया।
रामसकल पटेल ने बताया कि अस्पताल बनवाने से पहले वर्ष 1975 में वे तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री प्रभुनरायण सिंह से मिले तो उन्होंने कहा कि हम बजट नहीं दे पाएंगे। यदि आप लोगों के चंदे से भवन बनवा सकते हैं तो नक्शा जरूर उपलब्ध करा देंगे।
प्रभुनरायण सिंह ने नक्शा दिया और हमने चंदा लगाकर अस्पताल खड़ा कर दिया। इस प्रकार एक दो नहीं बल्कि कई कार्य रामसकल ने जनसहयोग से करवाया। इसी बीच, गुजरात से करीब 80 लोगों की टीम देश से दहेज खत्म करने की मुहिम छेड़ दी, जिससे प्रभावित होकर रामसकल ने 2001 में दहेज रहित विवाह की शुरुआत की।
पहले कार्यक्रम में 100 जोड़ों को परिणय सूत्र के बंधन में बांधे। इसमें उनकी भतीजी भी शामिल है। तभी से लगातार हर वर्ष 501 जोड़ों का दहेज रहित विवाह संपन्न कराते हैं। इसमें पूरा सहयोग उनके क्षेत्र की जनता करती है।
दहेज रहित विवाह के जरिए रामसकल ने अपने परिवार के तमाम लड़कों की भी शादी करवाई। रामसकल ने बताया कि समाजसेवा के उद्देश्य से ही उन्होंने शादी नहीं की। 82 वर्षीय रामसकल पटेल ने बताया कि अंतिम सांस तक समाज की सेवा करने की मंशा है।