रेल की पटरियों पर कदम-कदम पर खतरा है। ढीले कल-पुर्जों के सहारे बंधे जर्जर रेलवे ट्रैक पर दिनभर में दर्जनों ट्रेनें धड़धड़ाते हुए दौड़ाई जा रही हैं। ऐसे में कभी भी बड़ी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हाल के दिनों में एक के बाद एक हुईं ट्रेन दुर्घटनाओं के मद्देनजर शनिवार को अमर उजाला ने इलाहाबाद-वाराणसी रेल रूट पर ज्ञानपुर रोड और आसपास के स्टेशनों के इर्द-गिर्द रेलवे ट्रैक का जायजा लिया तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। कुछ स्थानों पर रेल की पटरियों के नीचे लगे स्लीपर्स जहां हिले मिले।
वहीं, कई जगहों पर पटरियों के नट-बोल्ट ढीले दिखे। पेंडल क्लिप और स्टीयर बार भी अपने जगह पर सुव्यवस्थित नहीं थी। ताबड़तोड़ ट्रेन दुर्घटनाओं की असली वजह चाहे जो हो लेकिन एक बात तो तय है कि रेलवे ट्रैक के रखरखाव और मेंटनेंस को लेकर भी पूरी संजीदगी नहीं बरती जा रही है।
रेलवे के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते आए दिन ट्रेन दुर्घटनाएं सामने आ रही हैं। अगर कर्मचारी छोटी-छोटी समस्याओं का निदान समय रहते कर लें तो शायद रेल हादसों में कुछ कमी जरूर आ सकती है।
ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन केे गेराईं स्थित क्रॉसिंग के पास जहां प्लेटफार्म के रेलवे ट्रैक जाकर मिलते हैं, वहीं बेसप्लेट काफी जर्जर स्थिति में आ चली है।
साथ ही पेंडल क्लिपें या तो ट्रैक से गायब मिलीं या ढीली दिखी। थोड़ा और आगे बढ़ने पर स्टीयर बार जर्जर स्थिति में मिली। सरायजगदीश हॉल्ट की तरफ बढ़ने पर रेलवे ट्रैक की फिश प्लेट की हालत भी खराब मिली। वहीं, स्टियर बार पर कसे गए नट बोल्ट किसी में नहीं थे।
पटरियों में लगे क्लिप भी अलग दिखे। इन समस्याओं के बाद भी रेलवे अगर हादसे की आशंका न करे तो यह सोच गलत साबित हो सकती है। इस संबंध में पीडब्ल्यूआई एके चौरसिया ने कहा कि भीटी से माधोसिंह तक रेलवे ट्रैक में कोई गड़बड़ी नहीं है।
रेलवे लाइन का नियमित निरीक्षण किया जाता है। जरूरत के हिसाब से ट्रैक की मरम्मत की जाती रहती है।