एसपी अभिषेक वर्मा ने बुधवार की शाम पुलिस लाइन में कामयाबी का खुलासा किया। बताया कि 23 जून को खान विभाग ने फर्जी परमिट (कूटरचित ई-फार्म सी) के जरिए गिट्टी परिवहन पकड़ा था और सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी निरीक्षक राबटर्सगंज रामस्वरूप वर्मा, खनन निरीक्षक अतुल दूबे, प्रभारी निरीक्षक एसओजी नागेश कुमार सिंह की मौजूदगी वाली टीम गठित कर मामले के जल्द खुलासे के निर्देश दिए गए।
एएसपी अनिल कुमार और सीओ सीटी को रणधीर मिश्रा को लगातार पर्यवेक्षण के लिए कहा गया। मिली जानकारियां के आधार पर नौगढ़ (चंदौली) थाना क्षेत्र के बोझ निवासी वाहन चालक दिलीप प्रजापति को गिरफ्तार किया गया तो पता चला कि पन्नूगंज थाना क्षेत्र का कूरा कला निवासी अश्वनी कुमार पटेल इसका मास्टरमाइंड है। चोपन थाना क्षेत्र के प्रीतनगर निवासी हिमांशु पांडेय फर्जी परमिट तैयार करने के लिए राजकीय सिक्योरिटी पेपर उपलब्ध कराता है।
डाला निवासी मोहन उर्फ अजय तथा सारनाथ (वाराणसी) थाना क्षेत्र के भदीवा अमौली निवासी सुरेश कुमार पाठक (एके इंटरप्राइजेज बिल्ली मारकुंडी के संचालक) अपने कर्मचारियों के साथ मिलकर पुराने ई-फॉर्म में वाहन संख्या, दिनांक, समय आदि में परिवर्तन कर गिट्टी परिवहन का फर्जी परमिट तैयार करते हैं।
प्लांट के कार्यालय पर दी दबिश तो फर्जी परमिट के मिल गए गई प्रमाण
दिलीप की निशानदेही पर एके इंटरप्राइजेज के बिल्ली मारकुंडी स्थित कार्यालय पर सुबह नौ बजे दबिश दी गई तो वहां जमालपुर (मिर्जापुर) थाना क्षेत्र के भदावर निवासी अमरनाथ त्रिपाठी उर्फ राजू त्रिपाठी, चोपन थाना क्षेत्र के कोटा निवासी रितेश कुमार जायसवाल, डाला निवासी मोहन उर्फ अजय कुमार और गढ़वा (झारखंड) के केतार निवासी संतोष कुमार जायसवाल फर्जी परमिट का कार्य करते पकड़े गए।
इसमें प्रयुक्त लैपटॉप, प्रिंटर, सिक्योरिटी पेपर सहित अन्य महत्वपूर्ण भी दस्तावेज बरामद किए गए। आरोपियों के खिलाफ खान व खनिज अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम तथा बीएनएस की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। एसपी ने बताया कि मामले में अश्वनी, हिमांशु और सुरेश कुमार पाठक भी वांछित हैं।
चालक को प्रति चक्कर 5000 देने का दिया गया लालच
चालक ने पुलिस को बताया कि व्ह अश्वनी का वाहन चलाता है। पकड़ी गई गिट्टी उसने फर्जी परमिट के आधार पर विंध्याचल स्टोन बिल्ली मारकुंडी से लोड किया था। प्रति चक्कर उसे पांच हजार का लालच दिया गया था। अश्वनी, हिमांशु और खनन क्षेत्र से समन्वय स्थापित कर गिट्टी लोड कराने, परिवहन की व्यवस्था और वाहन चालकों को निर्देश देने का कार्य करते थे। वहीं क्रशर संचालक सुरेश कुमार पाठक, उनके कर्मचारी अमरनाथ, रितेश और संतोष फर्जी परमिट तैयार करते थे।
आठ जून तक ही वैध था भंडारण लाइसेंस, फिर भी सरकारी कागजात का हो रहा था इस्तेमाल
एसपी ने बताया कि एके इंटरप्राइजेज का भंडारण लाइसेंस आठ जून तक ही वैध था। बावजूद उसके नाम पर जारी सिक्योरिटी पेपर और प्रयुक्त परमिटों का दुरुपयोग कर फर्जी ई-फॉर्म सी तैयार करते हुए अवैध खनिज परिवहन किया जा रहा था। जांच में सिक्योरिटी पेपर के 250 बंडल गायब मिले। उसमें से चार सिक्योरिटी पेपर गिट्टी परिवहन करते समय पकड़े गए। शेष की जानकारी जुटाई जा रही है। खान विभाग को सभी क्रशर प्लांटों को जारी सिक्योरिटी पेपर का मिलान करने के लिए कहा गया है। इस संबंध में खनन निदेशालय से भी वार्ता की जा रही है।