बजट पेश करने जाते सीएम और वित्त मंत्री
योगी सरकार के पहले बजट को लेकर पूर्वांचल के उद्यमियों में खुशी कम, मायूसी ज्यादा है। उनका कहना है कि बजट में उद्योग-व्यापार के विकास की बात तो की गई है लेकिन उसका कोई रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया गया है।
पांच साल में जीडीपी को दहाई के अंक में पहुंचाने की बात है लेकिन यह बिना उद्योग-कारोबार की बेहतरी के मुमकिन नहीं है। पूर्वांचल-बुंदेलखंड को एक्सप्रेस वे से जोड़ने के अलावा मेक इन यूपी, सिंगल विंडो सिस्टम और विशेष निवेश बोर्ड की घोषणा सराहनीय है लेकिन पूर्वांचल में उद्योग जगत को संवारने के लिए खासकर जीएसटी के बाद जैसी रियायतों की उम्मीद थी, वैसा कुछ नजर नहीं आया।
भारतीय औद्योगिक संघ के मंडलाध्यक्ष आरके चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने उद्योगों के विकास की बात कही है लेकिन यह कैसे होगा, इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया है।
मेक इन यूपी और सिंगल विंडो सिस्टम अच्छी पहल है लेकिन सिर्फ इतने से पूर्वांचल के पिछड़ेपन को दूर नहीं किया जा सकता। आईआईए के अध्यक्ष राजेश भाटिया ने कहा कि पूर्वांचल और बुंदेलखंड के विकास के लिए बजट का प्रावधान है लेकिन औद्योगिक विकास के लिए अलग से कोई बजट नहीं है।
हालांकि विशेष निवेश बोर्ड से उद्यमी, व्यापारी आशान्वित हैं। वाराणसी लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष के के गुप्ता ने कहा कि बिजली, औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा, संरचना और ढांचागत विकास से जुड़े कई पहलुओं पर उद्यमियों को जैसी उम्मीद थी, वैसा कुछ नहीं दिखा।
प्रमुख उद्यमी एवं बनारस बीड्स के संस्थापक अशोक गुप्ता ने कहा कि को ओवरऑल बेहतर कहा जा सकता है लेकिन इसमें उद्योग और निर्यात के लिए कुछ खास नहीं है।